चटक धूप में भिंडियालीगाड़ गदेरे के पास हुए भारी भूस्खलन से जानकीचट्टी-यमुनोत्री पैदल मार्ग का 40 मीटर हिस्सा ध्वस्त हो गया। भूस्खलन से पैदल मार्ग पर बना गार्डर पुल, रेलिंग एवं शेड के साथ ही नीलगिरी महाराज की कुटिया ध्वस्त हो गई। कुटिया में रह रहे साधु ने किसी तरह भाग कर जान बचाई। मार्ग बंद होने से यमुनोत्री धाम की यात्रा रोक दी गई है।
वहीं 24 से अधिक तीर्थयात्री एवं स्थानीय लोग यमुनोत्री की ओर फंस गए, जिन्हें पुलिस एवं एसडीआरएफ की मदद से सुरक्षित निकाला जा रहा है। कई दिनों से बारिश का सिलसिला थमा होने के बावजूद शुक्रवार सुबह करीब दस बजे चटक धूप के बीच जानकीचट्टी-यमुनोत्री पैदल मार्ग पर भिंडियालीगाड़ के पास भारी भूस्खलन हुआ। इससे पैदल मार्ग का करीब 40 मीटर हिस्सा ध्वस्त तबाह हो गया।
इस हिस्से में बना 15 मीटर स्पान का पैदल गार्डर पुल, रेलिंग और यात्री शेड बोल्डरों के नीचे दब गए। जबकि पास ही बनी नीलगिरी महाराज की कुटिया भी क्षतिग्रस्त हो गई। हादसे के वक्त नीलगिरी महाराज अपनी कुटिया में ही थे। भूस्खलन की तेज आवाज सुनकर वे बाहर भागे, जिससे उनकी जान बच गई। यात्रा मार्ग बंद होने से करीब 24 से अधिक तीर्थयात्री एवं स्थानीय लोग यमुनोत्री की ओर ही फंस गए।
भूस्खलन की सूचना मिलते ही पुलिस, एसडीआरएफ, राजस्व एवं लोनिवि की टीमें मौके पर पहुंची। भूस्खलन के ऊपरी हिस्से वाले जंगल में रस्सियों की मदद से यमुनोत्री की ओर फंसे हैदराबाद, मुंबई, उत्तरप्रदेश, हरियाणा आदि स्थानों के तीर्थयात्रियों को निकाला जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक इस हिस्से में अभी आवाजाही सामान्य होने में समय लगेगा।
इसे देखते हुए यमुनोत्री धाम की यात्रा पर जा रहे तीर्थयात्रियों को स्यानाचट्टी बैरियर पर ही रोक दिया गया है। यहां पुलिस के जगमोहन, खुशीराम, राधेश्याम, एसडीआरएफ के विपिन, संदीप, आशीष, प्रदीप आदि जवान यमुनोत्री की ओर फंसे यात्रियों को सुरक्षित इस ओर निकालने में जुटे हैं।