समय से पहले यहां हुई इतनी बर्फबारी कि पाइपों में ही जम गया पानी, बर्फ पिघलाकर पी रहे सेना के जवान
उच्च हिमालयी क्षेत्र में अभी से कड़ाके की ठंड पड़ने लगी है। नाभीढांग, कालापानी में तापमान माइनस में जाने से पानी पाइप में ही जमने लगा है। अमूमन यहां 15 दिसंबर के बाद ऐसी स्थिति आती थी, लेकिन इस बार पहले ही पानी जमने से सीमा पर तैनात हिमवीरों को काफी दिक्कत हो रही है।
धारचूला विकासखंड के व्यास घाटी में चीन सीमा पर सुरक्षा के लिए आईटीबीपी तैनात है। गर्मी हो या सर्दी, जवान हर मौसम में सीमा पर मुस्तैद रहते हैं। इस वर्ष क्षेत्र में कड़ाके की ठंड पहले ही शुरू हो गई है। कालापानी में तापमान माइनस पांच, नाभीढांग में माइनस नौ और गुंजी में माइनस तीन तक पहुंच रहा है।
आईटीबीपी ने बॉर्डर पोस्टों तक पानी की आपूर्ति के लिए जमीन के नीचे प्लास्टिक के पाइप बिछाए गये हैं। अत्यधिक ठंड के चलते पानी पाइपों में जमने लगा है।
जमा हुआ पानी पिघल कर टैंक तक पहुंच रहा है
हिमवीर रोज सुबह 10 बजे के बाद जमीन के नीचे से पाइप निकालकर उसे धूप में रख रहे हैं। इससे जमा हुआ पानी पिघल कर टैंक तक पहुंच रहा है। हालांकि जवानों को दो-तीन घंटे तक ही पानी मिल पा रहा है।
आईटीबीपी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पिछले वर्षों तक 15 दिसंबर के बाद ही पाइपों में पानी जमता था, लेकिन इस बार उच्च हिमालयी क्षेत्र में अधिक ठंड के चलते ऐसी स्थिति अक्तूबर अंत तक ही आ गई है। बल की अग्रिम चौकियों में राशन आदि की कोई किल्लत नहीं है। शीतकालीन राशन पहले ही हेलीकॉप्टरों के जरिये अग्रिम चौकियों तक पहुंचा दिया गया है।
बता दें कि पिछले साल भी ठंड की शुरुआत में ही पारा - 15 डिग्री तक पहुंच गया था। जिसके बाद भयानक ठंड के कारण पानी की लाइनें जम गई थी। इससे जवानों को बर्फ पिघलाकर पानी पीना पड़ रहा है। यही स्थिति इस बार भी बनी हुई है।