भगवान विश्वकर्मा की पूजा विधि-विधान से करने पर विशेष फल प्रदान करती है। भगवान विश्वकर्मा को देव शिल्पी कहा जाता है।
पंडित विपिन चंद्र जोशी ने बताया कि इवृश्चिक लग्न में सुबह 10:17 बजे से 12:34 तक पूजन करना विशेष लाभकारी व फलदायी है।
सुबह स्नान कर साफ कपड़े पहनने के बाद पूजा कि सामग्री से अक्षत, फूल, चंदन, धूप, अगरबत्ती, दही, रोली, सुपारी, रक्षा सूत्र, मिठाई, फल आदि से पूजा थाल सजा लें।
इसके बाद फैक्ट्री, वर्कशॉप, ऑफिस, दुकान की सफाई करें और पूजा आसन पर बैठें। विष्णु जी का ध्यान करें और पुष्प चढाएं। एक कमंडल में पानी लेकर उसमें पुष्प डालें। अब भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करें।
अब जमीन पर आठ पंखुड़ियों वाला कमल बनाएं। अब उस स्थान पर सात प्रकार के अनाज रखें। अनाज पर तांबे या मिट्टी के बर्तन में रखे पानी का छिड़काव करें।