उत्तरकाशी की सिलक्यारा सुरंग के निर्माण में लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। सुरंग के जिस संवेदनशील हिस्से में भूस्खलन हुआ वहां उपचार के लिए गार्टर रिब की जगह सरियों का रिब बनाकर लगाया गया है।
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शायद नहीं होता हादसा...
बताया कि सिलक्यारा सुरंग के मुहाने से 200 मीटर अंदर जहां भूस्खलन हुआ है वह हिस्सा संवेदनशील है जिसमें गार्टर रिब की जगह 32 एमएम की सरियों से बना रिब लगाया गया। जो कि मलबे का दबाव नहीं झेल पाया। बताया कि यहां गार्टर रिब लगाया गया होता तो शायद यह हादसा नहीं होता।
सुरंग के अंदर हैं दो संवेदनशील प्वाइंट
निर्माणाधीन सिलक्यारा सुरंग में दो प्वाइंट भूस्खलन के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं। पहला प्वाइंट सिलक्यारा मुहाने से 200 मीटर की दूरी पर है, जिसमें वर्तमान में भूस्खलन हुआ है। एक अन्य सिलक्यारा वाले मुहाने से ही 2000 से 2100 मीटर के मध्य है। टनल के एक मशीन ऑपरेटर ने बताया कि 2000 से 2100 के बीच वाले संवेदनशील पार्ट का स्थाई उपचार हुआ है लेकिन 200 मीटर के निकट वाले का नहीं।
भूस्खलन से दबी हैं दो मशीन
रविवार को सुरंग में हुए भूस्खलन के मलबे में एक शॉटक्रिट मशीन व एक बूमर मशीन दबने की सूचना मिली है। एक मशीन ऑपरेटर ने बताया कि यहां उस दौरान ट्रीटमेंट का काम चल रहा था। जब हल्का मलबा गिरा तो इन मशीनों में कार्यरत कर्मचारियों ने भागकर अपनी जान बचाई।
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टनल के संवेदनशील हिस्से को छोड़कर आगे काम करना खतरनाक होता है। संवेदनशील हिस्से का स्थिरीकरण करना जरूरी होता है। जब स्थिरीकरण करते हुए आगे बढ़ते हैं तो जैसा भूस्खलन टनल में हुआ है, इसका खतरा नहीं होता है। -प्रो.कमल जैन, आईआईटी रुड़की वैज्ञानिक