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Uttarkashi Disaster: युवक बोले- सीटियों और भागो-भागो की आवाज से खुली आंख, बाहर आए तो चारों ओर था मलबा

Sat, 09 Aug 2025 12:58 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश Published by: अलका त्यागी Updated Sat, 09 Aug 2025 12:58 PM IST
सार

Uttarkashi Disaster News: युवक जिस होम स्टे में ठहरे थे उसका भूतल पूरी तरह मलबे में डूब गया था जिससे भूतल में रह रहे तीन से चार लोग भी इन युवकों के सामने मलबे में समा गए।

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Uttarkashi Disaster Two Youths Told Aap Beeti of Flood Day Whole Incident after Rescue
आपदा में बचे युवक - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

धराली आपदा में मौत के मुंह से बचकर आए दो युवकों ने आपबीती सुनाई। युवकों ने बताया कि नाश्ता करने के बाद उनकी आंख लग गई थी, भागो-भागो और सीटियों की आवाज से आंख खुली, होम स्टे की बालकानी में आए तो देखा कि चारों ओर मलबा ही मलबा है। युवक जिस होम स्टे में ठहरे थे उसका भूतल पूरी तरह मलबे में डूब गया था जिससे भूतल में रह रहे तीन से चार लोग भी इन युवकों के सामने मलबे में समा गए।



हालांकि इन युवकों ने उन लोगों को बचाने का पूरा प्रयास किया लेकिन जब युवकों को लगा कि अब उनकी जान भी खतरे में है तो वह किसी तरह आधे डूब चुके होम स्टे से निकल कर सुरक्षित स्थान पर आए।

गुजरात निवासी चंदन और चौखुटिया अल्मोड़ा निवासी भूपेंद्र गंगोत्री धाम यात्रा के लिए निकले थे। पंकज ने दो अगस्त को ऋषिकेश से एक बाइक 10 दिन के लिए किराये पर ली और फिर अपने दोस्त भूपेंद्र को लेने कर्णप्रयाग चले गया। कर्णप्रयाग से दोनों गंगोत्री के लिए निकले।

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Uttarkashi Disaster Two Youths Told Aap Beeti of Flood Day Whole Incident after Rescue
उत्तरकाशी खीरगंगा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

बारिश होने के कारण वह चार अगस्त को धराली में ही रुक गए। भूपेंद्र ने बताया कि उनका विचार पांच अगस्त को सुबह गंगोत्री जाने का था लेकिन रात भर से बारिश हो रही थी तो वह बारिश रुकने का इंतजार करने लगे। नाश्ता करने के बाद उन्हें नींद आ गई। भूपेंद्र ने बताया कि तेज गड़गड़ाहट से उनकी नींद खुल गई, सीटियों की आवाज आ रही थी, लोग चिल्ला रहे थे भागो-भागो।

Uttarkashi Disaster Two Youths Told Aap Beeti of Flood Day Whole Incident after Rescue
उत्तरकाशी में फटा बादल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बाहर बालकानी में आकर देखा तो हमारे चारों ओर मलबा ही मलबा था। मैं पंकज को उठाने के लिए अंदर गया, जब हम दोनों बाहर आए तो देखा कि हमारे होम स्टे का भूतल पूरी तरह डूब चुका था। निचले तल मे रहे तीन लोग भी डूब चुके थे, हमें केवल एक व्यक्ति दिखाई दिया, जिसका सिर दिखाई दे रहा था, हमने उसे बचाने का प्रयास किया लेकिन जब हमें लगा कि अब हमारी जान भी संकट में है तो हमने उपर से छलांग लगा ली और किसी तरह रैंगते हुए सुरक्षित स्थान पर आए।
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Uttarkashi Disaster Two Youths Told Aap Beeti of Flood Day Whole Incident after Rescue
उत्तरकाशी आपदा - फोटो : आईटीबीपी
चंदन और भूपेंद्र ने बताया कि पहली लहर में पानी कम और मलबा अधिक था, जिसने सभी होटल और होम स्टे को बहा दिया था, दूसरी लहर में पानी अधिक था। दूसरी लहर ने बचे होटलों को भी अपनी चपेट में ले लिया। हमारा होम स्टे कुछ ऊंचाई पर था इसलिए पहली लहर में वह बच गया, लेकिन दूसरी लहर में हमारा वाला होम स्टे भी बह गया। चौराहे (सर्कल) में खड़े सबसे अधिक लोग इसकी चपेट में आए।
 
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Uttarkashi Disaster Two Youths Told Aap Beeti of Flood Day Whole Incident after Rescue
उत्तरकाशी में तबाही - फोटो : संवाद

सेना ने दिए कपड़े
चंदन और भूपेंद्र ने बताया कि उनका सारा सामान डूब गया था, उनके पास कपड़े भी नहीं थे। जब वह आर्मी कैंप में पहुंंचे तो वहां सेना के जवानोें ने उन्हें अपने कपड़े दिए। किराये पर ली बाइक भी आपदा में बह गई।

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