Weather: पहाड़ से लेकर मैदान तक भारी बारिश, मलबा व बोल्डर आने से 11 स्टेट हाईवे बंद, टिहरी झील का जलस्तर बढ़ा
मलबा व बोल्डर आने से 11 स्टेट हाईवे बंद हैं। इनमें धौतरी कमद आयारखाल मोटर मार्ग, सिलक्यारा -बनगांव- चापरा- सरोट मोटर मार्ग, मोरी- नैटवाड़ -सांकरी -जखोल, रुद्रप्रयाग-पोखरी-गोपेश्वर, कर्णप्रयाग-धारडुंग्री-मैखुरा-कंडारा-सोनला, उत्तरकाशी-टिहरी-घनसाली-तिलवाड़ा, भिकियासैंण-देघाट-बूगीधार-महलचौरी-बधुवाबाण-चौखुटिया मोटर मार्ग, देहरादून-किमाड़ी-मोतीलाल नेहरू-कार्ट मैकंजी-कंपनी गार्डन मोटर मार्ग, मिनस-अटल मोटरमार्ग, डंगोली-सैलानी-दाड़िमखेत व काठगोदाम-खुदानी, देवीधूरा-लोहाघाट-पंचेश्वर मोटर मार्ग कई स्थानों पर बंद हैं। लोनिवि की मशीनरी इन सभी मार्गों को खोलने में जुटी है।
मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधू की ओर से बृहस्पतिवार को जारी आदेश में कहा गया कि मैदानी मार्गों के मुकाबले पर्वतीय मार्गों पर सड़क हादसों में ज्यादा जनहानि हो रही है। बरसात शुरू होने के साथ ही तमाम सड़कों को भी नुकसान होने लगा है। उन्होंने कहा कि चिह्नित ब्लैक स्पॉट्स के सुधारीकरण के लिए लघुकालीन और दीर्घकालीन उपाय करने के लिए समयसीमा निर्धारित की जाए। उन्होंने कहा है कि सभी दुर्घटना स्थलों के सुधारीकरण के लिए संवेदनशील और अतिसंवेदनशील का वर्गीकरण करें और प्राथमिकता के आधार पर सुधारीकरण के काम कराए जाएं। पर्वतीय मार्गों पर क्रश बैरियर लगाने के लिए भी विशेष कदम उठाए जाएं। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी तालमेल के साथ जल्द से जल्द सड़कों की सुरक्षा के लिए काम शुरू करने के लिए कहा।
मानसून में लोगों की जान की हिफाजत के लिए सिंचाई विभाग ने हर जिले में एक बाढ़ नियंत्रण कक्ष बनाया है। नदियों और बैराजों पर जल स्तर की लगातार निगरानी की जा रही है। विभाग ने 113 बाढ़ चौकियां भी स्थापित की हैं।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, विभाग 23 स्थानों पर नदियों और 14 स्थानों पर बैराज, डैम के जलस्तर और डिस्चार्ज की निगरानी कर रहा है। विभाग की ओर से विभिन्न जिलों में 113 राजस्व बाढ़ चौकियों की स्थापना की गई है। बाढ़ चौकियों के माध्यम से ग्रामीणों को चेतावनी पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा संबंधित कर्मचारियों के पास ग्राम प्रधानों के मोबाइल नंबर दिए गए हैं।
बागेश्वर के कपकोट के ग्राम कुंवारी में शम्भू नदी पर भू-स्खलन के कारण मलबा आ गया था। इस कारण 80 मीटर लंबी और 58 मीटर चौड़ी प्राकृतिक झील का निर्माण हो गया था। बृहस्पतिवार तक झील से पानी के निकासी के लिए सिंचाई विभाग ने 12 मीटर चौड़ाई में चैनल निर्माण कर दिया। जिससे 1050 क्यूसेक पानी की निकासी हो रही है। इस झील की नियमित निगरानी की जा रही है।
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