शीतकाल में खून जमा देने वाले माइनस 15 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी सुरक्षा एजेंसियों के जांबाज भारत-चीन सीमा पर स्थित दारमा घाटी में डटे हैं। तापमान गिरने के कारण भारत-चीन सीमा पर व्यास घाटी के ज्योलिंकांग के पास समुद्र तल से 14 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित पार्वती कुंड और कुटी में बहने वाला गड़नाला जम गया है। कुटी यांगती (नदी) भी कहीं-कहीं पर जमी है।
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चीन सीक्षा क्षेत्र में जमा पानी
- फोटो : अमर उजाला
इस कारण सीमा पर तैनात जवान बर्फ पिघलाकर पानी पी रहे हैं। हालांकि पिछले कुछ दिन से उच्च हिमालयी क्षेत्र में हिमपात नहीं हुआ है, इसके बावजूद हाड़ कंपा देने वाली ठंड का प्रकोप जारी है। गुंजी और कालापानी से लेकर कुटी और लिपुलेख तक हर तरफ बर्फ की चादर बिछी है। व्यास घाटी के अधिक ऊंचे पहाड़ों में दो फुट से अधिक बर्फ जमी है।
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चीन सीक्षा क्षेत्र में जमा पानी
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दारमा घाटी में भी जवान माइनस पांच से माइनस 14 डिग्री सेल्सियस में सीमा की सुरक्षा कर रहे हैं। वहां बनीं अग्रिम चौकियों पर 24 घंटे गश्त की जा रही है। व्यास घाटी के कुटी निवासी नगेंद्र कुटियाल ने बताया कि कुटी में मौसम साफ होने के बाद भी एक फुट बर्फ घरों और खेतों में जमी है।
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भारत चीन सीमा क्षेत्र में बर्फ
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दारमा घाटी के सीपू निवासी वाहन स्वामी महेंद्र सीपाल, दांतु में होम स्टे स्वामी संजय दताल ने बताया कि पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष सड़क पर कोई बड़ा ग्लेशियर नहीं बना है, हालांकि कहीं-कहीं बर्फ जमी है। पर्यटकों के आने पर आवाजाही हो रही है। महेंद्र सीपाल ने बताया कि घाटी के अंतिम गांव सीपू, मारछा, तिदांग, गो, ढाकर, बोन, दुग्तु, सोन के खेतों और घरों की छत में एक फुट से अधिक बर्फ जमी है।
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चीन सीमा क्षेत्र में जमी बर्फ
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शीतकाल में इन गांवों में कोई नहीं है। उन्होंने बताया कि दारमा घाटी में गधेरे और नाले जमे हैं। कुछ स्थानों पर बड़ी नदियां भी बर्फ से ढकी हैं। पिछले साल दारमा को जाने वाली सड़क पर बड़े अस्थायी ग्लेशियर बन गए थे। इसके चलते माइग्रेशन पर जाने वाले लोगों के लिए इन ग्लेशियरों को काटना पड़ा था।