मुख्यमंत्री पद पर अपने नाम की घोषणा होने के बाद तीरथ सिंह रावत भावुक हो गए थे। उन्होंने कहा कि कभी सोचा भी न था, कल्पना भी नहीं की थी कि यहां तक पहुंचूंगा। उन्होंने कहा कि वह केवल संघ से जुड़े थे, भाजपा को नहीं जानते थे। अटल बिहारी वाजपेयी के श्रीनगर, गढ़वाल दौरे के बाद उन्हें प्रेरणा मिली।
उत्तराखंडः नाम की घोषणा होने के बाद भावुक अंदाज में कुछ ऐसा बोल गए नए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत
मुख्यमंत्री तीरथ ने कहा, मैं तो आज का हूं, पुराना नहीं लेकिन फिर भी मुझे मौका मिला। इसके बाद उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी से जुड़ा किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि श्रीनगर में भाजपा की इकाई नहीं थी। उन्हें बताया गया कि अटल जी का कार्यक्रम है और उन्हें प्रचार, प्रसार का पूरा काम देखना है। उन्होंने बताया कि मेरठ वाले जैन साहब के यहां रात में अटल जी ने भोजन किया, उन्हें भोजन परोसने का मौका मिला। सुबह का नाश्ता उन्होंने एक किराये के मकान में किया। तब अवसर मिला। तब वहां भाजपा नहीं थी, संघ को ही संभालना पड़ता था। उन्होंने कहा कि अटल जी का व्यवहार, उनकी दूरदर्शी सोच ने उन्हें और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली।
तीरथ ने कहा कि मैं एक छोटे से गांव से आया हूं। हमेशा टीम के साथ काम किया। जो भी जिम्मेदारियां मिलीं, उनका गंभीरता से निर्वहन किया। अब भी जो जिम्मेदारी मिली है, उसे टीम भावना के साथ आगे बढ़ाऊंगा। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रदेश का जो चौमुखी विकास किया है। पिछले दशक में इतना काम नहीं हुआ। प्रदेश ने नया आयाम दिया। हर घर को नल, नल को जल, एक रुपये में पानी का कनेक्शन देने का काम किया। हाल ही में उन्होंने एक बैठक ली थी, जिसमें बैंकों के अधिकारी भी आए थे। देखा कि किस तरह से राज्य सरकार ऋण दे रही है। काश्तकार व अन्य उद्यम लगाने वाले मजबूत बन रहे हैं। इतने काम कभी उत्तराखंड में नहीं हुए हैं। वह इन सभी कामों को धरातल पर और मजबूत करने का प्रयास करेंगे।
तीरथ सिंह रावत का मुख्यमंत्री बनना कोई सामान्य बात नहीं है। पार्टी नेतृत्व ने राजनीतिक समीकरण और अन्य सभी पहलुओं के साथ ही उनके व्यवहार, बेदाग छवि को भी नए सीएम के चुनाव में तवज्जो दी। तीरथ सिंह रावत अपने राजनीतिक और संगठन के सफर में बेदाग रहे हैं। उन पर आज तक कोई आरोप नहीं लगा। राज्य के पहले शिक्षा मंत्री तीरथ सिंह रावत को उनका सौम्य व्यवहार भी खास बनाता है। पार्टी आलाकमान तीरथ के चुनाव के बाद यह मानकर चल रहा है कि इससे विधायकों का असंतोष खत्म हो जाएगा। दरअसल, इसकी बानगी तब देखने को मिली, जब भाजपा कार्यालय में तीरथ के नाम की घोषणा हुई। सभी के चेहरे पर संतुष्टि के भाव नजर आए। कोई भी सीधे विरोध में नहीं दिखा।