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2016 में भी उत्तराखंड की राजनीति में आया था भूचाल, लगाना पड़ा था राष्ट्रपति शासन

Tue, 09 Mar 2021 07:52 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 09 Mar 2021 07:52 PM IST
सार

यह पहली बार नहीं है कि उत्तराखंड ही राजनीति में हलचल पैदा हुई। 2016 में भी हरीश रावत की सरकार के समय ऐसा हो चुका है। 

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Uttarakhand Politics Crisis News Today: President's rule was imposed in Uttarakhand after Pranab da signature
त्रिवेंद्र सिंह रावत और हरीश रावत - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

यह पहली बार नहीं है कि उत्तराखंड की राजनीति में हलचल पैदा हुई है। 2016 में भी हरीश रावत की सरकार के समय ऐसा हो चुका है। तब कुछ विधायकों ने बगावत कर दी थी और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा था। पिछले तीन दिनों से उत्तराखंड की राजनीति में भूचाल आया हुआ था और इसकी शुरुआत हुई थी अचानक गैरसैंण में बजट पारित कर त्रिवेंद्र सिंह रावत और उनके मंत्रियों के देहरादून एयरलिफ्ट होने से। शनिवार को अचानक दिल्ली से रमन सिंह देहरादून पहुंचे और कोर ग्रुप की बैठक बुलाई गई। जिसके बाद कुछ विधायक दिल्ली रवाना हो गए। इस बैठक में मंत्री, विधायक शामिल हुए। जिसके बाद सोमवार को त्रिवेंद्र अपना गैरसैंण दौरा स्थगित कर अचानक दिल्ली रवाना हो गए। तब मुख्यमंत्री बदलने के कयास और तेज हो गए। सोमवार को त्रिवेंद्र सिंह रावत भाजपा के कई बड़े नेताओं से मिले और मंगलवार दोपहर तक स्थिति साफ हो गई। त्रिवेंद्र ने राज्यपाल को इस्तीफा सौंप दिया। उत्तराखंड के लोग 2016 में राज्य में राष्ट्रपति शासन लगने को शायद ही कभी भुला सकें। उस दौर में प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति थे।



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Uttarakhand Politics Crisis News Today: President's rule was imposed in Uttarakhand after Pranab da signature
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

उत्तराखंड में 18 मार्च 2016 को तत्कालीन हरीश रावत (कांग्रेस) सरकार के शासन के दौरान कांग्रेस के 36 में से नौ विधायकों ने बगावत कर दी थी और बाद में सरकार को अल्पमत में बता कर निलंबित करने की मांग को लेकर विधानसभा की वेल में ही धरने पर बैठ गए थे।

Uttarakhand Politics Crisis News Today: President's rule was imposed in Uttarakhand after Pranab da signature
गोविंद सिंह कुंजवाल - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

20 मार्च को तत्कालीन विस अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने इन विधायकों को निलंबित कर दिया था। जिस पर विधायकों ने सरकार को अल्पमत में बता विधानसभा अध्यक्ष के इस निर्णय को उनके अधिकार से बाहर बताया। 

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Uttarakhand Politics Crisis News Today: President's rule was imposed in Uttarakhand after Pranab da signature
प्रणब मुखर्जी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

21 मार्च को कांग्रेस के बागी विधायक भाजपा के विधायकों के साथ राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिले और प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की मांग की थी। इन विधायकों के भाजपा के साथ मिलकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल देने और केंद्रीय कैबिनेट की 26 मार्च की सिफारिश के बाद 27 मार्च 2016 को राज्य में प्रणब मुखर्जी के हस्ताक्षर से पहली बार राष्ट्रपति शासन लगा था।

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Uttarakhand Politics Crisis News Today: President's rule was imposed in Uttarakhand after Pranab da signature
कपिल सिब्बल (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

कपिल सिब्बल सहित अन्य अधिवक्ताओं ने मुखर्जी के आदेश को संविधान की हत्या करने वाला कहकर हाईकोर्ट में इसकी जबरदस्त खिलाफत की। 28 मार्च को हरीश रावत ने कोर्ट में इस आदेश को चुनौती दी जिस पर कोर्ट ने उन्हें 31 मार्च को फ्लोर टेस्ट के निर्देश दिए, जबकि 30 मार्च को चुनौती देने पर डबल बेंच ने इसे स्थगित कर दिया था। 

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