यह पहली बार नहीं है कि उत्तराखंड की राजनीति में हलचल पैदा हुई है। 2016 में भी हरीश रावत की सरकार के समय ऐसा हो चुका है। तब कुछ विधायकों ने बगावत कर दी थी और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा था। पिछले तीन दिनों से उत्तराखंड की राजनीति में भूचाल आया हुआ था और इसकी शुरुआत हुई थी अचानक गैरसैंण में बजट पारित कर त्रिवेंद्र सिंह रावत और उनके मंत्रियों के देहरादून एयरलिफ्ट होने से। शनिवार को अचानक दिल्ली से रमन सिंह देहरादून पहुंचे और कोर ग्रुप की बैठक बुलाई गई। जिसके बाद कुछ विधायक दिल्ली रवाना हो गए। इस बैठक में मंत्री, विधायक शामिल हुए। जिसके बाद सोमवार को त्रिवेंद्र अपना गैरसैंण दौरा स्थगित कर अचानक दिल्ली रवाना हो गए। तब मुख्यमंत्री बदलने के कयास और तेज हो गए। सोमवार को त्रिवेंद्र सिंह रावत भाजपा के कई बड़े नेताओं से मिले और मंगलवार दोपहर तक स्थिति साफ हो गई। त्रिवेंद्र ने राज्यपाल को इस्तीफा सौंप दिया। उत्तराखंड के लोग 2016 में राज्य में राष्ट्रपति शासन लगने को शायद ही कभी भुला सकें। उस दौर में प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति थे।
2016 में भी उत्तराखंड की राजनीति में आया था भूचाल, लगाना पड़ा था राष्ट्रपति शासन
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Tue, 09 Mar 2021 07:52 PM IST
सार
यह पहली बार नहीं है कि उत्तराखंड ही राजनीति में हलचल पैदा हुई। 2016 में भी हरीश रावत की सरकार के समय ऐसा हो चुका है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन