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उत्तराखंड : सीएम त्रिवेंद्र के इस्तीफा देते ही फिर चर्चाओं में आया 30 करोड़ का ये 'बंगला', पढ़ें क्या है इसका राज

Wed, 10 Mar 2021 01:00 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 10 Mar 2021 01:00 AM IST
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Uttarakhand Political Crisis News: 30 Crore Rupees Bungalow Myth came to spotlight After CM Resign
उत्तराखंड का मुख्यमंत्री आवास - फोटो : अमर उजाला

उत्तराखंड की सियासत में मची उथल-पुथल के बीच मुख्यमंत्री आवास का वास्तुदोष एक बार फिर चर्चाओं में आ गया है। 30 करोड़ रुपये की लागत से बने इस सरकारी आवास में अब तक जितने भी मुख्यमंत्री रहे, वह अपना कार्यकाल पूरा ही नहीं कर पाए। अब त्रिवेंद्र सिंह रावत का नाम इस फेहरिस्त में चौथे स्थान पर है। सीएम के इस्तीफा देते ही इस बंगले का मिथक सत्ता के गलियारों में फिर चर्चा का विषय बन गया।



मुख्यमंत्री आवास में वास्तुदोष की अफवाहों के कारण करीब सभी पूर्व मुख्यमंत्री इसमें रहने से बचते रहे हैं। त्रिवेंद्र सिंह रावत के यहां आने से पूर्व राज्य संपत्ति विभाग ने बंगले को संवारने का काम भी किया था। इस मुख्यमंत्री आवास का निर्माण नारायणदत्त तिवारी के कार्यकाल में शुरू हुआ था, जो भाजपा के तत्कालीन मुख्यमंत्री बीसी खंडू़डी के पहले कार्यकाल में पूरा हुआ। खंडू़ड़ी ही सर्वप्रथम इस आवास में रहे, लेकिन कुछ ही समय बाद उन्हें पद से हटना पड़ा था।

यह भी पढ़ें... उत्तराखंड: असंतुष्टों की गोलबंदी ने खिसका दी मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र की कुर्सी, विधायक ही नहीं मंत्री भी थे नाराज

डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक भी मुख्यमंत्री के रूप में इस आवास में ज्यादा दिनों तक पद पर नहीं रह पाए। भुवन चंद्र खंडू़ड़ी जब सितंबर 2011 में दोबारा मुख्यमंत्री बने, तो करीब छह माह आवास में रहने के बाद पार्टी चुनाव हार गई।

Uttarakhand Political Crisis News: 30 Crore Rupees Bungalow Myth came to spotlight After CM Resign
उत्तराखंड का मुख्यमंत्री आवास - फोटो : अमर उजाला

खुद खंडू़ड़ी सीएम होने के बावजूद कोटद्वार से चुनाव हार गए। इसके बाद प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी और इसके मुखिया बने विजय बहुगुणा। उनको भी यही मुख्यमंत्री आवास मिला और वह भी करीब एक साल और 11 माह तक ही पद पर रह पाए। पार्टी ने ही केदारनाथ आपदा के बाद उन्हें हटा दिया। हालांकि, वह इस आवास में सबसे ज्यादा समय तक रहने वाले मुख्यमंत्री बने।

Uttarakhand Political Crisis News: 30 Crore Rupees Bungalow Myth came to spotlight After CM Resign
उत्तराखंड का मुख्यमंत्री आवास - फोटो : फाइल फोटो

हरीश रावत भी अपनी कुर्सी सुरक्षित रखने के लिए इस मुख्यमंत्री आवास में शिफ्ट नहीं हुए, मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपना पूरा कार्यकाल बीजापुर गेस्ट हाउस में ही बिताया। वह कभी भी इस सरकारी आवास में नहीं गए। हालांकि, वह भी 2017 में अपनी किस्मत के सितारे नहीं बदल पाए। 

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Uttarakhand Political Crisis News: 30 Crore Rupees Bungalow Myth came to spotlight After CM Resign
उत्तराखंड का मुख्यमंत्री आवास - फोटो : अमर उजाला

डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक इस आवास में मई 2011 से सितंबर 2011 तक रहे थे। वहीं, मेजर जनरल (रिटायर्ड) भुवन चंद्र खंडूड़ी सितंबर से मार्च 2012 तक रहे। इस बंगले में विजय बहुगुणा ने मार्च 2012 से जनवरी 2014 तक समय बिताया।

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मुख्यमंत्री आवास में त्रिवेंद्र सिंह रावत - फोटो : अमर उजाला

वहीं, फरवरी 2014 से मार्च 2017 तक मुख्यमंत्री आवास खाली  रहा। इस दौरान हरीश रावत को यहां आना था लेकिन वे यहां रहने नहीं आएथे। इसके बाद सभी मिथकों को पीछे छोड़ त्रिवेंद्र सिंह रावत मार्च 2017 में इस आवास में रहने आए थे। लेकिन संयोग ही रहा कि वे भी पांच साल का कार्यकाल पूरा न कर सके। 

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