प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पारिवारिक गुरु महामंडेश्वर अभिराम दास त्यागी इन दिनों सरयू नदी का उद्गम स्थल मानी जाने वाली सहस्त्रधारा के निकट भद्रतुंगा में साधना में लीन हैं। बीच-बीच में वह शिष्यों के साथ क्षेत्र भ्रमण कर लोगों को सरयू की महत्ता के बारे में भी बता रहे हैं। सरमूल, सहस्त्रधारा, भद्रतुंगा विकास समिति के सलाहकार दयाल कुमल्टा के अनुसार महामंडलेश्वर त्यागी के अलावा सहस्त्रधारा और भद्रतुंगा में अन्य साधक भी साधना के लिए आए हुए हैं। कोरोना काल में जहां दूसरे पर्यटन और धार्मिक पर्यटन स्थलों पर सन्नाटा छाया हुआ है, वहीं भगवान बागनाथ की वासस्थली बागेश्वर के धार्मिक पर्यटन स्थलों में देशी- विदेशी सैलानियों के साथ ही तमाम संत उपासना कर रहे हैं। सरमूल-सहस्त्रधारा, भद्रतुंगा उपासकों से गुलजार है। उपासकों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पारिवारिक गुरु महामंडलेश्वर अभिराम दास त्यागी भी शामिल हैं। उन्हें सिद्धि प्राप्त संत बताया जाता है। दयाल कमुल्टा ने बताया कि महामंडलेश्वर त्यागी 11 मई से भद्रतुंगा में साधना कर रहे हैं, जो 13 जून तक चलेगी। वह 14 जून को गुजरात प्रस्थान कर जाएंगे। सहस्त्रधारा और भद्रतुंगा धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में जिले का प्रमुख स्थल बनता जा रहा है। कोरोना काल में भी यह सिलसिला रुका नहीं। कोरोना काल में देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु भद्रतुंगा और सहस्त्रधारा की यात्रा पर आए। अप्रैल और मई में 500 से अधिक श्रद्धालु यहां आ चुके हैं। साधक साथ में आरटी-पीसीआर जांच रिपोर्ट लेकर आ रहे हैं।
उत्तराखंड : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पारिवारिक गुरु इन दिनों भद्रतुंगा में कर रहे साधना, तस्वीरें
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पावन सरयू नदी का उद्गम स्थल सहस्त्रधारा कपकोट के दूरस्थ गांव झूनी से आगे पड़ता है। इसे सरमूल नाम से भी जाना जाता है। सरमूल जाने के लिए बागेश्वर से पतियासार तक पक्की सड़क है। पतियासार से भद्रतुंगा तक पांच किमी कच्ची सड़क बनी है। वहां से सात किमी की पैदल दूरी पर सहस्त्रधारा है। सरमूल की एक पहाड़ी से जल सौ धाराओं में विभक्त होकर नीचे गिरता है, जहां जलधारा गिरती है, उस स्थान को सहस्त्रधारा कहा जाता है।
पिछले आठ वर्षों से सरमूल, सहस्त्रधारा, भद्रतुंगा विकास समिति सरयू नदी को पहचान दिलाने और देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में शामिल करने की मुहिम चला रही है। सरयू नदी का उल्लेख महर्षि वेद व्यास रचित स्कंदपुराण के मानसखंड में भी है। मानसखंड में सरयू महात्म्य नाम से अलग से अध्याय है। सहस्त्रधारा के पास में सरयू के साथ ही अन्य देवी-देवताओं के मंदिर बने हैं। यहां से जल राशि सरयू नदी के रूप में भद्रतुंगा होते हुए सौंग, कपकोट, हरसीला होते हुए बागेश्वर पहुंचती है। पिथौरागढ़ के घाट, पंचेश्वर होते हुए टनकपुर में शारदा में मिल जाती है।
आस्ट्रेलिया से पत्नी के साथ आए राजकोट गुजरात के भरत जोशी सहस्त्रधारा के प्राकृतिक सौंदर्य और महत्ता से खासे प्रभावित हैं। कहते हैं कि बार-बार आने का मन करता है। इस समय इंदौर के मनीष कुमार गर्ग, बारडोली की अर्पणा पटेल, बेगूसराय के सत्य नारायण शर्मा, रुद्रप्रयाग के उपमन्यु दास, ऋषिकेष के देवराम दास, पवन दास, सिंगापुर से बीबीए का कोर्स कर रही ऐश्वर्या गर्ग, उज्जैन के हाईकोर्ट अधिवक्ता अजय जैन आदि परिवार और मित्रों के साथ सहस्त्रधारा में मौजूद हैं।
इससे पूर्व बारडोली की हेमाली मिस्त्री, सीकर के सुरेश कुमावत, गुजरात के प्रशांत चेवली, रामेश्वरम के माधव दास, कोयंबटूर के अंबरीष दास, चित्रकूट के बालक दास, लक्ष्मण झूला के सीताराम दास आदि ने भी अप्रैल और मई में परिवार के साथ सहस्त्रधारा आकर पूजा अर्चना की थी। पिछले दो महीनों के दौरान हरिद्वार, अयोध्या, गुजरात आदि स्थानों से आए साधु-संतों ने भी सरयू मूल में डुबकी लगाकर मां सरयू की पूजा उपासना की। कई साधुओं ने एक सप्ताह से अधिक समय तक यहां रुककर साधना की।