मां पूर्णागिरि धाम के मुख्य मंदिर की पहाड़ी में रविवार को अचानक आग लग गई। इससे श्रद्धालुओं में भगदड़ मच गई। राहत की बात यह है कि आग मुख्य मंदिर तक नहीं पहुंच पाई और भगदड़ में कोई श्रद्धालु चोटिल नहीं हुआ। घटना के वक्त दर्शन के लिए करीब चार हजार श्रद्धालुओं की भीड़ थी। मंदिर समिति के स्वयंसेवकों ने किसी तरह आग पर काबू पाया गया। सूचना मिलते ही वन विभाग की रेस्क्यू टीम भी मौके पर पहुंच गई थी।
पूर्णागिरि धाम में रविवार को दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा था कि दोपहर करीब 12:30 बजे अचानक मुख्य मंदिर की पहाड़ी पर आग फैल गई। हवा से धुएं का गुबार मुख्य मंदिर में फैल गया। इससे श्रद्धालुओं में भगदड़ मच गई। इससे पहले की कोई हादसा होता वहां मौजूद मंदिर समिति के स्वयंसेवकों ने पहले श्रद्धालुओं की भगदड़ को नियंत्रित किया और फिर आग बुझाने में जुट गए।
VIDEO : मां पूर्णागिरि मंदिर की पहाड़ी में आग लगने से श्रद्धालुओं में मची भगदड़
मंदिर समिति के कोषाध्यक्ष कैलाश पांडेय ने बताया कि दूसरी पहाड़ी से आग मुख्य मंदिर की पहाड़ी तक पहुंची। फिलहाल मंदिर के आसपास की पहाड़ी में लगी आग बुझा दी गई है। स्वयंसेवकों को आग पर नजर रखने के लिए तैनात किया गया है। वन विभाग की टीम और पुलिस कर्मी भी आग से सुरक्षा के उपाय करने में जुटे हैं।
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पूर्णागिरी मंदिर की पहाड़ी में लगी आग
- फोटो : अमर उजाला
बता दें कि मां पूर्णागिरि धाम का मेला होली के बाद गर्मियों में लगता है और गर्मी में धाम की पहाड़ियों में आग का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि आग से कभी कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ है, लेकिन हर साल लगने वाली आग खतरा बढ़ाती है।
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पूर्णागिरी मंदिर की पहाड़ी में लगी आग
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इससे पहले वर्ष 2019 में मेले के दौरान पूर्णागिरि की पहाड़ी में धधकी आग मुसीबत बन गई थी। तब मुख्य मंदिर से नीचे की पहाड़ी से फैलकर आग टुन्यास तक पहुंच गई थी, जिसे नियंत्रित करने में अग्निशमन विभाग, पुलिस और मंदिर समिति के स्वयंसेवकों के पसीने छूट गए थे।
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पूर्णागिरी मंदिर की पहाड़ी में लगी आग
- फोटो : अमर उजाला
वहीं, पूर्णागिरि मेले में इस बार एक दिन में सिर्फ 10 हजार श्रद्धालुओं को ही दर्शन की अनुमति मिलेगी। कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरे के मद्देनजर पुलिस ने एसओपी जारी कर दी है। दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को ऑनलाइन पंजीकरण कराने के साथ ही सुरक्षित दूरी, मास्क और सैनिटाइजर का भी प्रयोग करना अनिवार्य होगा।
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पूर्णागिरी मंदिर की पहाड़ी में आग लगने से मची भगदड़
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कोरोना के कारण पिछले वर्ष छह दिन बाद ही मेला स्थगित करना पड़ा था। इस बार भी संक्रमण की देश में फिर से बढ़ती रफ्तार देखते हुए पुलिस प्रशासन कोई कोताही बरतने के मूड में नहीं है। यही वजह है कि पुलिस ने मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। इसके तहत 30 मार्च से शुरू होकर 30 अप्रैल तक चलने वाले मेले में श्रद्धालुओं को कोरोना से बचाव के नियमों का पालन करना होगा।