करीब डेढ़ दशक तक चिकित्सा क्षेत्र में योगदान देने वाले उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने राजनीतिक राह चुनी। चार बार मध्य प्रदेश में विधायक बने। एक बार कैबिनेट मंत्री रहे और एक बार लोकसभा सांसद भी चुने गए।
राज्यपाल का जन्म मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के ग्राम पिपरिया में हुआ था। उनके पिता का नाम सेवकराम बिसेन, माता का नाम सोना बाई बिसेन है। उनकी पत्नी भानुमति बिसेन हैं। एक पुत्र डॉ.लोकेश बिसेन ऑर्थो सर्जन हैं, जबकि दो पुत्रियां विवाहित हैं। डॉ. ढाल सिंह आयुष चिकित्सक हैं।
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उत्तराखंड के नए राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने 1975 से 1990 तक चिकित्सकीय कार्य करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों खासकर गंगेरूआ गांव में सेवाएं दीं। 1990 में मध्य प्रदेश की बरघाट विधानसभा से पहली बार विधायक चुने गए। 1993 में दूसरी बार विधायक बने।
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1998 में तीसरी बार विधायक बने और विभिन्न समितियों में सदस्य रहे। साथ ही भाजपा विधायक दल के सचेतक भी रहे। वर्ष 2003 में लगातार चौथी बार बरघाट से विधायक चुने जाने के बाद कैबिनेट मंत्री बने।
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उन्हें वन, परिवहन, खनिज साधन मंत्री का दायित्व मिला। इसके अलावा वन विकास निगम, लघु वनोपज संघ, राज्य परिवहन निगम, खनिज विकास निगम के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया। 2004 में उन्हें स्कूल शिक्षा और जेल विभाग का दायित्व मिला। 2012 से 2013 में चतुर्थ राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष पद पर रहे। 2019 में बालाघाट सिवनी लोकसभा से सांसद चुने गए।
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मध्य प्रदेश में वन मंत्री रहते हुए डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने तेंदूपत्ता नीति जारी की। नीति आने के बाद बिना कोई खर्च किए पहले वर्ष में राजस्व एक करोड़ से बढ़कर 16 करोड़, दूसरे वर्ष में 35 और तीसरे वर्ष में 65 करोड़ रुपये हो गया। इसी प्रकार शिक्षा मंत्री रहते हुए गांव की बेटी योजना, बच्चों को साइकिल प्रदाय योजना, मध्य प्रदेश में मोगली उत्सव समेत उनके कई फैसले यादगार हैं।