उत्तराखंड की नैनीताल सीट से आ रहे रुझानों में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को करारी हार का सामना करना पड़ रहा है। इनकी नैय्या मोदी लहर में डूबती नजर आ रही है। आज सुबह से आ रहे रुझानों में हरीश रावत भाजपा से पीछे रहे और शाम होते-होते यह अंतर लगातार बढ़ता गया।
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पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत
बता दें कि लोकसभा के चुनावी महासंग्राम में उतरने से पहले ही हरीश रावत के टिकट को लेकर कांग्रेस में घमासान छिड़ गया था। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने टिकट काटे जाने की सूचना पर अपने समर्थक सात विधायकों के साथ दिल्ली में डेरा डाला था।
इन विधायकों ने अपनी पार्टी के ही कुछ वरिष्ठ नेताओं पर आरोप लगाया था कि वह भाजपा के साथ मिलकर चुनाव में कांग्रेस की संभावनाओं को खत्म करना चाहते हैं। लोकसभा चुनाव की नामांकन प्रक्रिया से एक दिन पहले तक आपसी लड़ाई में उलझी कांग्रेस एक भी उम्मीदवार का नाम घोषित नहीं कर पाई थी।
पौड़ी गढ़वाल सीट से मनीष खंडूड़ी, टिहरी से प्रीतम सिंह और अल्मोड़ा से प्रदीप टम्टा को हाईकमान ने स्पष्ट संकेत दे दिए थे। लेकिन हरिद्वार और नैनीताल सीट की गुत्थी बुरी तरह उलझ गई थी। क्योंकि पहले हरीश रावत को हरिद्वार से टिकट दिया जा रहा था। लेकिन बाद में उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए नैनीताल से उन्हें चुनाव में उतारने पर हाईकमान ने सहमति जताई थी।
राजनीतिक गलियारों में खबर फैल रही थी कि कांग्रेस के कुछ नेताओं के दबाव के चलते हरीश रावत का टिकट काटा गया है। जो विधायकों हरीश रावत के समर्थन में दिल्ली गए थे। उनमें पूर्व स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल, उपनेता प्रतिपक्ष करन माहरा, मंगलौर विधायक काजी निजामुद्दीन, मनोज रावत, हरीश धामी, आदेश चौहान, ममता राकेश, फुरकान अहमद शामिल थे।