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मुंबई पर चढ़ा उत्तराखंडी संस्कृति का खुमार, तस्वीरों में देखें

Sun, 24 Jan 2016 01:20 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 24 Jan 2016 01:20 PM IST
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मुंबई पर चढ़ा उत्तराखंडी संस्कृति का खुमार, तस्वीरों में देखें

uttarakhand kauthig 2016 festival in mumbai.

उत्तराखंड के लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी के 'मैं नि करदू त्वे से बात... हट छोड़ दे मेरो हाथ...तिन चिट्ठी किलै नी भेजी...' गीत की धुन के बजते ही मुंबई के रामलीला मैदान में बना कौथिग परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

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दूसरे दिन के कार्यक्रम की शुरुआत भी नंदा की डोली से हुई। परंपरागत छोलिया नृत्य के साथ लोग देर रात तक झूमते रहे। सुरेश काला ने एक भजन गया, प्रवासियों के बीच रेशमा शाह के गीत ‘जख बांज की डाली वखी हमरो प्यारो गांव..., स्वर्ग से प्यारो उत्तराखंड... गीत को सुनकर परिसर में मौजूद हर कोई झूम उठा।

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इस अवसर पर हिमगिरी महिला मंडल ने नृत्य नाटिका प्रस्तुत की। इसमें प्रस्तुति देने वाले कलाकारों ने पहली बार मंच पर प्रदर्शन किया। गायक दिवान सोन ने ‘ओ दीपा घसियारी..., छोड़ दिलु पहाड़ सहित कई लोकप्रिय कुमाऊंनी गीत सुनाए। इस मौके पर स्कूली बच्चों ने ‘पंदेरी का डाला घुघुती...’, ‘कान मा बल झुमका’ और कन्याल रूप की समूह नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति दी।

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मुंबई पर चढ़ा उत्तराखंडी संस्कृति का खुमार, तस्वीरों में देखें

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मुंबई कौथिग के दूसरे दिन उत्तराखंड के लोक संगीत और नृत्य की बहार रही। इस आयोजन में विशेष रूप से मुख्यमंत्री हरीश रावत भी पहुंचे और उन्होंने प्रवासी उत्तराखंडियों को बताया कि अपना राज्य तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। इस दौरान पेटिंग्स की एग्जिबिशन भी लगाई गई।

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शनिवार के आयोजन में सबसे खास प्रस्तुति शाश्वत जे पंडित की रही। उन्होंने अपने गिटार से एक से बढ़कर एक पहाड़ी गीतों को धुनों के जरिए प्रस्तुत कर वाहवाही बटोरी। उन्होंने तिन चिट्ठी किलै नी भेजी..., तू दिखेंदी जन जुन्यली..., सरुली मेरो जिया लगेगी। बेडू पाको बारा मासा समेत कई गीतों को रिद्म में गाकर सबको मुग्ध कर दिया।

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