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उत्तराखंड में विभागों का बंटवारा: नए मंत्रियों में बंशीधर हेवीवेट, यतीश्वरानंद हल्के

Wed, 17 Mar 2021 11:11 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 17 Mar 2021 11:11 AM IST
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Uttarakhand cabinet minister department distribution news
कैबिनेट मंत्री बंशीधर भगत - फोटो : Bansidhar Bhagat / Facebook Page

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की कैबिनेट में शामिल हुए नए मंत्रियों में कैबिनेट मंत्री बंशीधर भगत का कद बढ़ाया गया है। मुख्यमंत्री ने उनके राजनीतिक अनुभव को देखते हुए विधायी एवं संसदीय मामलों की जिम्मेदारी दी है। मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार शामिल हुए स्वामी यतीश्वरानंद को बहुत अहम विभाग नहीं मिल सके। उन्हें गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग का मंत्रालय के साथ भाषा एवं पुनर्गठन की जिम्मेदारी मिली है। इनमें से गन्ना विकास व चीनी उद्योग में उनके पास कुछ करने के लिए जरूर है, लेकिन बाकी दो विभागों में कुछ खास नहीं है। तीरथ मंत्रिमंडल में पांचवें नंबर के कैबिनेट मंत्री बिशन सिंह चुफाल के पास भी पेयजल ही सबसे अहम महकमा है। बाकी वर्षा जल संग्रण, ग्रामीण निर्माण व जनगणना सरीखे विभागों में अल्प अवधि में कुछ अनूठा करने की संभावनाएं नहीं दिखतीं। अब भाजपा सरकार की एक रुपये में पानी का कनेक्शन देने और हर घर में नल पहुंचाने की लोकलुभावन योजना को धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी चुफाल के कंधों पर है। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को जरूर सैनिक कल्याण, औद्योगिक विकास, लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्यम, खादी एवं ग्रामोद्योग जैसे अहम विभाग मिले हैं। इन विभागों में अधिक परिणाम देने की संभावना है। खासतौर पर नए स्टार्ट अप शुरू करने और रोजगार के अवसर सृजित करने के मामले में।

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कैबिनेट मंत्री यतीश्वरानंद - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

तीरथ सिंह रावत की नई सरकार और मंत्रियों के लिए अब विभागों की सियासी पिच पर ट्वेंटी-ट्वेंटी खेलने की बड़ी चुनौती होगी। एक तो सरकार के पास करीब नौ महीने का समय ही बचा है। दूसरे नए मंत्रियों पर परफॉर्मेंस का दबाव होगा। उधर, मुख्यमंत्री के लिए भी चार साल के कार्यकाल से इतर अपने कार्यकाल में बेहतर निर्णय और नीतियां बनाने की चुनौती है। प्रदेश में 2022 के विधानसभा चुनाव फरवरी-मार्च में होंगे। इसकी अधिसूचना संभावित तौर पर दिसंबर में जारी हो जाएगी। लिहाजा, तीरथ सरकार के मंत्रियों के पास अब बमुश्किल नौ महीने का समय बचा हुआ है।

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बिशन सिंह चुफाल - फोटो : Facebook Page

जो मंत्री पूर्व के विभागों में काम कर रहे हैं, उनके लिए तो राह थोड़ी आसान होगी, लेकिन बंशीधर भगत, बिशन सिंह चुफाल, गणेश जोशी और स्वामी यतीश्वरानंद के लिए सभी विभाग नए हैं। उनके लिए पहली चुनौती तो इन विभागों की योजनाओं को समझकर इन्हें आगे बढ़ाने की होगी। दूसरी चुनौती कार्यकर्ताओं और समर्थकों की आकांक्षाओं पर खरा उतरने की भी होगी। क्योंकि मंत्री बनने और समय कम होने के चलते इन चारों विधायकों के पास काम का बोझ भी बढ़ना लाजिमी है। लिहाजा, अब देखने वाली बात यह होगी कि विभागों की सियासी पिच पर यह मंत्री कैसे ट्वेंटी-ट्वेंटी खेलते हैं।
 

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तीरथ सिंह रावत - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

किसको कौन सा विभाग-
मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत : गोपन (मंत्रिपरिषद), कार्मिक, सतर्कता, सुराज, भ्रष्टाचार एवं जनसेवा, गृह, वित्त, नियोजन, राज्य संपत्ति, राजस्व, न्याय, तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, चिकित्सा स्वास्थ्य, नागरिक उड्डयन, सूचना एवं लोक संपर्क, लोक निर्माण विभाग, आबकारी, नियोजन, सचिवालय प्रशासन, सामान्य प्रशासन, ग्राम्य विकास, ऊर्जा, औद्योगिक विकास (खनन), अखिल भारतीय सेवाओं का संस्थापन।

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सतपाल महाराज - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

कैबिनेट मंत्री-
सतपाल महाराज : सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण, लघु सिंचाई, जलागम प्रबंधन, भारत नेपाल उत्तराखंड नदी परियोजनाएं, पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मस्व।
बंशीधर भगत : विधायी, संसदीय कार्य, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले, शहरी विकास, आवास, सूचना एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी।
डॉ.हरक सिंह रावत : वन, पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, श्रम, कौशल विकास एवं सेवायोजन, आयुष, आयुष शिक्षा।
बिशन सिंह चुफाल : पेयजल, वर्षा जल संग्रहण, ग्रामीण निर्माण, जनगणना।
यशपाल आर्य : परिवहन, समाज कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण, छात्र कल्याण, निर्वाचन।
अरविंद पांडेय : विद्यालयी शिक्षा (बेसिक), विद्यालयी शिक्षा (माध्यमिक), खेल, युवा कल्याण, पंचायती राज, संस्कृत शिक्षा।
सुबोध उनियाल : कृषि, कृषि शिक्षा, कृषि विपणन, उद्यान एवं कृषि प्रसंस्करण, उद्यान एवं फलोद्योग, रेशम विकास, जैव प्रौद्योगिकी।
गणेश जोशी : सैनिक कल्याण, औद्योगिक विकास, लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्यम, खादी एवं ग्रामोद्योग।

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