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उत्तराखंड के लाल का अमेरिका में कमाल, लांग-लास्टिंग बैटरी बना जीता 34 करोड़ का अवार्ड

Sun, 04 Dec 2016 10:22 AM IST
चंदन बंगारी, भूपाल बोरा/काशीपुर, सोमेश्वर
चंदन बंगारी, भूपाल बोरा/काशीपुर, सोमेश्वर Updated Sun, 04 Dec 2016 10:22 AM IST
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uttarakhand born scientist shailesh upreti won 5 lakh dollar award in america.
Shailesh Upreti - फोटो : AmarUjala
अमेरिका में हुई 76वेस्ट एनर्जी प्रतियोगिता में अल्मोड़ा जिले के तल्ला ज्लूया (मनान) निवासी वैज्ञानिक-उद्यमी डॉ. शैलेश उप्रेती की कंपनी चार्ज सीसीसीवी (सी4वी) ने 5 लाख डॉलर (करीब 34.2 करोड़ रुपए) का पुरस्कार जीता है।
uttarakhand born scientist shailesh upreti won 5 lakh dollar award in america.
Shailesh Upreti - फोटो : FB

बिंगमटन यूनिवर्सिटी में हुए अवार्ड समारोह में न्यूयॉर्क की लेफ्टिनेंट गवर्नर कैथलीन होचूल ने 9 महीने चली इस प्रतियोगिता को जीतने पर शैलेश को पुरस्कार दिया। इस प्रतियोगिता में विश्व की 175 कंपनियों ने हिस्सा लिया था। शैलेश की कंपनी चार्ज सीसीसीवी, न्यूयार्क को यह पुरस्कार 20 से 22 घंटे का बैकअप देने वाली बैटरी बनाने पर दिया गया है।

uttarakhand born scientist shailesh upreti won 5 lakh dollar award in america.
Shailesh Upreti

न्यूयॉर्क राज्य ऊर्जा अनुसंधान और विकास प्राधिकरण की ओर से न्यूयार्क की अर्थव्यवस्था और  पर्यावरण सुधार के विकल्प पर कार्य करने के मिशन को बढ़ावा के लिए दुनियाभर की कंपनियों में प्रतिस्पर्धा कराई गई थी। जनवरी में शुरू हुई प्रतियोगिता 8 चरणों में हुई और 6 अक्तूबर को पुरस्कार की घोषणा हुई थी। 30 नवंबर को न्यूयॉर्क में लेफ्टिनेंट गवर्नर कैथलीन होचूल ने डॉ. शैलेश को यह पुरस्कार दिया।

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uttarakhand born scientist shailesh upreti won 5 lakh dollar award in america.
Shailesh Upreti - फोटो : fb

फोन में डॉ. शैलेश ने बताया कि उन्होंने ऐसी तकनीक को पेटेंट कराया है, जो न केवल लिथियम ऑयन बैटरी के जीवनकाल को 20 साल के लिए बढ़ाता है, बल्कि उसकी भंडारण क्षमता और शक्ति में सुधार के साथ ही आग या शॉर्ट सर्किट की स्थिति में उसका तापमान कम कर देता है।

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Shailesh Upreti - फोटो : AmarUjala

यह तकनीक अगली पीढ़ी के लिए ऐसी बैटरी तैयार करती है, जिससे सौर ऊर्जा को स्टोर करने के साथ ही बिजली से चलने वाली कारों, ट्रकों और बसों को चलाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसी बैटरी के निर्माण के लिए न्यूयार्क और विश्व स्तर पर कई कंपनियों को इस तकनीक का लाइसेंस दिया गया है।

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