मौसम खराब रहने के कारण बुधवार को भी पर्वतारोहियों का बचाव अभियान नहीं चला। अभी भी दो पर्वतारोही लापता चल रहे हैं जबकि एक पर्वतारोही का शव एडवांस बेस कैंप से मातली हेलीपैड नहीं लाया जा सका है। बुधवार को भी लगातार दूसरे दिन डोकराणी बामक ग्लेशियर क्षेत्र में लापता पर्वतारोहियों का खोज अभियान नहीं चल पाया। बीते चार अक्तूबर को हुए हिमस्खलन हादसे में 29 पर्वतारोही लापता हो गए थे।
Uttarakhand Avalanche: मौसम खराब होने से नहीं मिल पाए दो लापता, डोकराणी बाम ग्लेशियर से खाली हाथ लौट आया दल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बुधवार को एसडीआरएफ घटना स्थल से लौट आई है। रेस्क्यू अभियान के प्रभावित होने पर ले. कर्नल दीपक वशिष्ठ हिमाचल, विनय पंवार उत्तराखंड व सौरभ विश्वास पश्चिम बंगाल के परिजनों में मायूसी है।
डोकराणी बामक ग्लेशियर क्षेत्र में हिमस्खल की चपेट में आए पर्वतारोहियों की तलाश में सेना की सेंटर कमांड लखनऊ के डॉग स्क्वायड की भूमिका अहम रही। लेब्राडोर प्रजाति की 6 वर्षीय इंद्रा और 5 वर्षीय रजिया ने पांच दिनों तक 17 हजार फीट की ऊंचाई पर चले रेस्क्यू अभियान में 4 शवों को ढूंढ निकाला।
हादसे के बाद से चलाए गए रेस्क्यू अभियान में हाई एल्टीट्यूड वार फेयर स्कूल गुलमर्ग, आईटीबीपी, एसडीआरएफ, सेना, एनडीआरएफ व निम के जवान जुटे हुए हैं। इन सभी के साथ सेना के डॉग स्क्वाएड को भी लगाया गया था। इंद्रा के हैंडलर लांस नायक प्रभुदास व रजिया के हैंडलर लांस नायक शुभंकर पाल ने बताया कि दोनों जन्म से ही सेना में हैं।
दोनों अब तक कई रेस्क्यू अभियान में भाग ले चुके हैं। डोकरानी बामक ग्लेशियर क्षेत्र में दोनों पांच से छह घंटे तक काम करते थे। दोनों को फिलहाल तेखला स्थित सेना के कैंप में रखा गया है। आवश्यकता पड़ने पर इन्हें फिर घटनास्थल पर भेजा जाएगा।
ये भी पढ़ें...Amar Ujala Exclusive: टैक्सी में बैठने में घटती है अफसरों की शान, बदल दी पीली पट्टी की पहचान, पढ़ें पूरी खबर