तीन तलाक के मामले में सरकार को दखल देने की जरूरत नहीं है। सरकारी दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मजहबी कानून पहले से ही इंसानियत और जरूरतों के हिसाब से पुख्ता हैं।
देशभर के उलेमाओं ने तीन तलाक पर कह दी ये बड़ी बात
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देहरादून में रजा चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से आयोजित मोहसिन-ए-इंसानियत कांफ्रेंस में पहुंचे देशभर के उलेमाओं ने एकसुर में यह बात उठाई। रविवार को नगर निगम टाउनहॉल में इमाम अहमद रजा चैरिटबेल ट्रस्ट की ओर से आयोजित कांफ्रेंस की शुरुआत ट्रस्ट के चेयरमैन और नायक शहर काजी सैय्यद अशरफ हुसैन कादरी ने की।
मुख्य वक्ता हजरत मौलाना सगीर अहमद जोखनपुरी, मौलाना मुफ्ती इकरार हुसैन नईमी ने पैगंबर हजरत मुहम्मद (स.अ.) की सुन्नतों के बारे में बताया। उन्होंने लोगों से उनकी सुन्नतों पर अमल करने की अपील की।
मौलाना म़ुस्तफीज नईमी ने तोहीद-ओ शिर्क पर बोलते हुए कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम ने दुनिया से शिर्क को मिटाकर तोहीद (एकेश्वरवाद) का सबक सिखाया। कहा कि इस्लाम का आधार ही तोहीद है। शिर्क के लिए इस्लाम में कोई जगह नहीं।
इसके बाद मौलाना इमदाद कादरी ने तीन तलाक पर केंद्र सरकार से मजहबी कानून में दखल न देने की अपील की। कहा कि इस्लाम ने हमें जो रास्ते बताए गए हैं, वह काफी हैं। मजहब के कानून में दखलअंदाजी कतई बर्दाश्त नहीं होगी।