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शाहजहां और मुमताज की 'प्रेम कहानी' के दो ऐसे सच, जिसने बदल दी थी उनकी जिंदगी
टीम डिजिटल/अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 27 Nov 2017 06:38 PM IST
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शाहजहां और मुमताज की प्रेम कहानी किसी परिचय की मोहताज नहीं है। लेकिन हम आपको बता रहे हैं कि उनकी जिंदगी के दो ऐसे राज जिन्हे बहुत ही कम लोग जानते होंगे। यहां पढ़िए...
ताज महल
- फोटो : SELF
मुमताज 19 साल में 14 बार गर्भवती हुईं। इसी के बाद उनकी मौत हुई जिसने शाहजहां को अंदर से तोड़ दिया। वहीं शाहजहां के पुत्र औरंगजेब को अपने पिता से नफरत हो गई। मध्यकालीन इतिहास में क्रूर और धर्मांध शासक के रूप में पहचाने जाने वाले औरंगजेब को उसके पिता शाहजहां की नफरत ने और क्रूर बना दिया। पिता शाहजहां के इस बुरे बर्ताव की वजह से उसकी क्रूरता तो बढ़ी है, भाइयों के प्रति घृणा भी पैदा हुई।
aurangzeb
यह बात औरंगजेब पर आधारित पुस्तक ‘दि ओसन ऑफ कोबरा’ के लेखक मुराद बेग ने बताई। उन्होंने यह भी बताया कि औरंगजेब ने चित्रकूट, गुवाहाटी आदि स्थानों के 30 मंदिरों के रख-रखाव की व्यवस्था के आठ गांव का राजस्व निश्चित कर रखा था।
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valley of words
हाल ही में दून में आयोजित ‘वैली ऑफ वर्ड्स’ के सत्र में मुराद बेग ने बताया था कि शाहजहां ने औरंगजेब को कभी पसंद नहीं किया था। वजह यह थी कि जब शाहजहां की पत्नी मुमताज गर्भवती थीं तो उन्होंने सेब खाने की इच्छा जाहिर की। शाहजहां दक्षिण में कहीं थे, वहां पर सेब उपलब्ध नहीं रहा।
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सेब को तलाशते समय शाहजहां के पास एक फकीर दो सेब लिए आया। उसने कहा कि जब सेब से महक आनी बंद हो तो समझो जीवन पर खतरा है। साथ ही यह भी कहा कि आपके जिस बेटे की आंख काली और त्वचा सफेद हो उससे सावधान रहें।