एक हजार साल पुराने भगवान शिव के सबसे ऊंचे शिवालय पर खतरा मंडरा रहा है। जानिए इसके पीछे की वजह...
केदारनाथ के बाद अब भगवान शिव के इस धाम पर मंडरा रहा खतरा, ये है इसके पीछे की वजह
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साल 2013 में केदारनाथ धाम में आपदा आई थी। इसके बाद तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के धाम में भी खतरा पैदा हो गया है। यहां प्राचीन मंदिर के सभामंडप की दीवार के कई पत्थरों ने अपनी जगह छोड़ दी है। ये पत्थर बाहर के लिए खिसक रहे हैं, जिससे मंदिर के लिए खतरा बना है। हक-हकूकधारियों व प्रबंधन समिति ने शासन, प्रशासन से मंदिर की दीवारों की मरम्मत की मांग की है।
समुद्रतल से 3680 मीटर (12073 फीट) ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ धाम विश्व का सबसे ऊंचाई वाले स्थान का शिव मंदिर है। पंचकेदार में तृतीय केदार के रूप में पूजनीय है, जहां भगवान आशुतोष के बाह भाग की पूजा होती है। लेकिन बीते वर्षो में भूकंप व क्षेत्र में आई आपदाओं के कारण मंदिर को खतरा पैदा हो रहा है। शंकराचार्य काल में निर्मित मंदिर की दीवारें जर्जर हो रही हैं।
सभामंडप की दीवार के ऊपरी कोने के पत्थर बाहर की ओर खिसक गए हैं, जिस कारण वहां काफी स्थान खाली हो गया है, जिसे छोटे-छोटे पत्थरों से भरने का प्रयास किया गया है, जो नाकाफी है। मंदिर पीछे की तरफ भी कई जगहों पर पत्थर अपनी जगह छोड़ रहे हैं। यहीं नहीं, धाम में मौजूद अन्य छोटे-छोटे मंदिर भी जीर्णशीर्ण हो रहे हैं। लेकिन सुध लेने वाला कोई नहीं हैं। मंदिर के प्रबंधक प्रकाश पुरोहित का कहना है कि मंदिर की सुरक्षा और देखरेख को लेकर लंबे समय से शासन, प्रशासन को अवगत कराया जा रहा है।
लेकिन सुध नहीं ली जा रही है। इधर, मठापति राम प्रसाद मैठाणी, सुबोध मैठाणी आदि का कहना है कि तृतीय केदार तुंगनाथ धाम निरंतर उपेक्षा की जा रही है। जून 2013 की आपदा के बाद भी यहां शासन, प्रशासन के आला अधिकारी नहीं पहुंचे हैं। अगर, जल्द मंदिर संरक्षण को लेकर ठोस प्रयास नहीं किए गए तो, मंदिर की दीवारों के कटवा पत्थर कभी भी भरभरा कर ढह सकते हैं। उन्होंने केदारनाथ धाम की तर्ज पर तृतीय केदार तुंगनाथ मंदिर की दीवारों की एएसआई के जरिए मरम्म्त की मांग की है।