प्रतिष्ठा दिवस के दिन 15 जून को कैंची मेले में मालपुए का प्रसाद बांटा जाता है। मालपुए बनाने का काम 12 जून से शुरू हो गया। शुद्ध देशी घी से बने मालपुए बनाने के यहां अलग नियम हैं। और यह नियम किसी तप से कम नहीं है।
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देवभूमि का ऐसा मंदिर जहां प्रसाद बनाने के लिए भी करना पड़ता है कठिन 'तप'
कमलेश जोशी/ अमर उजाला, भवाली (नैनीताल)
Updated Tue, 13 Jun 2017 11:29 AM IST
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pm modi and mark zuckerberg's baba neem karoli
- फोटो : file photo
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प्रसाद बनाने में वही श्रद्धालु भाग ले सकता है जो व्रत लेकर आए और धोती, कुर्ता धारण कर उस अवधि में लगातार हनुमान चालीसा का पाठ कर रहा हो।
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सोमवार सुबह से तीन दिन तक लगातार प्रसाद बनाने का काम चालू रहेगा। प्रसाद के रूप में मालपुए बांटने की इच्छा बाबा नीम करौली महाराज की ही थी। प्रसाद की शुद्धता को देखते हुए वही श्रद्धालु प्रसाद बनाने में भागीदारी करते हैं जो कि इस दौरान उपवास पर रहते हैं।
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neem karoli baba
सोमवार से बारी-बारी से श्रद्धालु प्रसाद बनाने में अपनी भागीदारी करेंगे। मालपुए बनाने के बाद उन्हें पेटियों और डालियों में रख दिया जाता है। 15 जून को बाबा को भोग लगाने के बाद ही इसे प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। कैंची मंदिर के प्रसाद की महत्ता इतनी है कि इसे पाने के लिए लोग दूर-दूर से यहां मंदिर में पहुंचते हैं।
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जो लोग यहां नहीं पहुंच पाते वह अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के माध्यम से प्रसाद मंगाते हैं। मालपुए का प्रसाद लाखों श्रद्धालुओं के लिए बनाया जाएगा। ट्रस्ट के प्रबंधक विनोद जोशी ने बताया कि प्रसाद बांटने के लिए लाखों की संख्या में कागज की थैलियां मंगाई गई हैं।