रुद्रप्रयाग के अगस्त्यमुनि ब्लॉक के दशज्यूला पट्टी की आराध्य मां भगवती चंडिका देवी की वन्याथ (दिवारा यात्रा) के तहत समुद्र मंथन लीला की गई। इस अद्भुत क्षण के हजारों देवी भक्त साक्षी बने। समुद्र मंथन में 14 रत्नों में निकले अमृत (चरणामृत) का पान करने के लिए श्रद्धालु यहां बड़ी संख्या में मौजूद रहे। इस अमृत को प्रसाद रूप में भक्तों में वितरित किया गया।
समुद्र मंथन के साक्षी बने हजारों भक्त : तस्वीरों में देखें 14 रत्नों में निकले अमृत का पान करने लिए अलकनंदा किनारे उमड़ा हुजूम
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मां चंडिका की वन्याथ (दिवारा यात्रा) में समुद्र मंथन का विशेष महत्व है। मान्यता है कि देवी की उत्तर दिशा की दिवारा यात्रा पूरी होने के बाद पश्चिम दिशा की यात्रा होती है, जिसमें समुद्र मंथन की परंपरा है। साथ ही यह भी कहा जाता है कि जब चंडिका छह माह तक गांवों का भ्रमण करती है, तो उसके साथ एरवाल, पश्वा, ध्याणियां व ग्रामीण भी रहते हैं। ऐसे में अपने मूल मंदिर में प्रवेश से पहले मां चंडिका समुद्र मंथन से निकले अमृत को अपने भक्तों को देकर उन्हें आरोग्य व सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती है।
समुद्र मंथन लीला के बाद मां चंडिका की दिवारा रात्रि प्रवास के लिए छिनका गांव पहुंची। जहां पर ग्रामीणों ने ढोल-दमाऊं के साथ आराध्य का स्वागत किया। साथ ही रात्रि जागरण कर कीर्तन-भजन का आयोजन किया। दशज्यूला क्षेत्र की आराध्य मां चंडिका की दिवारा यात्रा 92 वर्ष के बाद बीते साल विजयदशमी के पर्व पर शुरू हुई थी।
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