ज्योतिष भविष्यवाणी पर यकीन करें तो अच्छी खबर नहीं है। तीन महीने बाद कुदरत अपना कहर बरपाएगी। पढ़ें, क्या कहते हैं नक्षत्र...
वर्तमान वर्ष में अनेक जगह भारी वर्षा के योग हैं। वायु प्रधान वर्ष होने के कारण हवा और भूकंप भी खासे असर दिखा सकते हैं। रोहिणी का वास समुद्र तट पर जब भी हुआ है तभी भारी वर्षा देश में हुई है। कुंओं, तालाबों और नदी नालों में पर्याप्त जल बना रहेगा।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य जब आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करते हैं तो भारी वर्षा होती है। संवत के राजा से भी वर्षा ऋतु का निर्धारण किया जाता है। ज्योतिषाचार्य डा. प्रतीक मिश्र के अनुसार ही सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश इस बार 21 जून को हो रहा है।
इसके ठीक 20 दिन बाद 10 जुलाई से जोरदार वर्षा शुरू हो जाएगी। इसी समय सूर्य मिथुन लग्न में प्रवेश करेंगे जो वर्षा का लग्न माना गया है।
अत: कहीं बहुत अधिक वर्षा तो कहीं बाढ़ तथा कहीं आंधी तूफान के साथ वर्षा के योग बन रहे हैं। देश के कुछ भागों में अलबत्ता अल्प वर्षा का भी योग है। यह भारत दक्षिण भारत समुद्र तट से जुड़े हुए है।