उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस) की ओर से सलेमपुर से बांग्लादेशी समेत तीन आतंकियों की गिरफ्तारी से हरिद्वार फिर सुर्खियों में है। बांग्लादेशी आतंकी अलीनूर सलेमपुर में नाम बदलकर रहता था। सलेमपुर में एक मदरसे में बच्चों को पढ़ाने की आड़ में उनके दिमाग में नफरत का जहर घोल रहा था।
Uttarakhand: मदरसे में नफरत का जहर घोल रहा था अलीनूर, गजवा-ए-हिंद की फौज खड़ी करने की थी साजिश
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अलीनूर, मुदस्सिर और कामिल को सिडकुल के दादपुर गोविंदपुरी से उठाया था जबकि टीम ने ज्वालापुर के कपड़े की दुकान पर भी छापा मारा। वहां से दुकान संचालक अब्दुल रहमान को गिरफ्तार किया गया। हालांकि, दुकान संचालक को तीन से चार दिन बाद छोड़ दिया गया। अलीनूर मूल रूप से गोपालगंज ढांका बांग्लादेश का है। उसका संबंध आतंकी संगठन क्यूआईएस और जेएमबी से है। अलीनूर मुस्लिम युवाओं को गजवा-ए-हिंद की विचारधारा से जोड़ने का काम करता है।
सूत्रों के मुताबिक अलीनूर सलेमपुर में मदरसे में बच्चों को भी पढ़ाता था। बच्चों के दिमाग में वह नफरत के बीज बो रहा था। अलीनूर असम के ग्वालपाड़ा में भी मदरसे के बच्चों को पढ़ा चुका है। हालांकि, स्थानीय पुलिस और एलआईयू आतंकी अलीनूर व मुदस्सिर के बारे में कुछ भी जानकारी होने से इनकार कर रही है। एसपी सिटी स्वतंत्र कुमार सिंह के मुताबिक यूपी एटीएस के छापे और आतंकी पकड़े जाने की कोई जानकारी नहीं है।
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सलेमपुर और ज्वालापुर मुस्लिम बाहुल्य इलाका है। अधिकतर युवा बेरोजगार और अशिक्षित हैं। अलीनूर, कामिल और मुदस्सिर ऐसे युवाओं को अपने जाल में फंसाकर उनका ब्रेनवॉश करते थे। ज्वालापुर और सलेमपुर में गजवा-ए-हिंद की फौज तैयार करने के लिए मुस्लिम युवाओं को देश के खिलाफ भड़काते थे। उनके साथ नुक्कड़ बैठकें करते थे।