तमिल संत और भक्ति धारा के महाकवि तिरुवल्लुवर की प्रतिमा के लोकार्पण के लिए दो-दो प्रदेशों के राज्यपाल धर्मनगरी पहुंचे पर विरोध के चलते आलवर संत की प्रतिमा का सिर्फ अलंकरण हो पाया। अभी तक प्रतिमा के लगने का स्थान भी तय नहीं है।
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thiruvalluar statue in haridwar
- फोटो : अमरउजाला
उत्तर भारत में तुलसी, सूरदास, कबीर और रसखान का जो स्थान है वहीं दक्षिण भारत में संत एवं प्रख्यात कवि तिरुवल्लुवर का है। बावजूद इसके धर्मनगरी में भक्ति धारा के एक फकीर की प्रतिमा स्थापित करने का विरोध हुआ। प्रतिमा लग जाती तो उत्तर और दक्षिण का महासंगम महातीर्थ पर हो जाता।
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thiruvalluar statue in kanya kumari
- फोटो : अमरउजाला
भक्ति धारा के जिस महाकवि का गंगा तट पर विरोध हुआ उनकी 133 फुट ऊंची विशाल प्रतिमा कन्या कुमारी में उस स्थान पर लगी है जहां बंगाल की खाड़ी और अरब सागर का मिलन होता है। दुनियाभर के लाखों लोग प्रतिवर्ष तमिल कवि पर अध्ययन करने कन्याकुमारी जाते हैं।
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thiruvalluar statue in haridwar
- फोटो : अमरउजाला
लेकिन जब दक्षिण के इस महान संत और महाकवि की प्रतिमा धर्मनगरी में लगने का समय आया तो अध्यात्म जगत से ही विरोध में आवाज उठ आई। दक्षिण के संत की प्रतिमा को लगाये जाने पर साधु-संत विरोध में उतर आए। यहीं नहीं तमिल कवि की प्रतिमा के लगाए जाने का दो बार स्थान बदला गया पर विरोध के चलते रातों-रात प्रतिमा को हटाया गया और बुधवार को सिर्फ अलंकरण हो पाया।
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thiruvalluar temple
- फोटो : wikipedia
कई शोध प्रबंधों का केंद्र संत तिरुवल्लुवर रहे हैं। दक्षिण में उनके रचित ग्रंथ और संग्रह रामचरितमानस की तरह पढ़े जाते हैं। कई विश्वविद्यालयों में संत तिरुवल्लुवर पर आधारित शोधपीठ विद्यमान है।