125 साल पहले जिसने स्वामी विवेकानंद को ज्ञान दिया था, वह फिर से जीवित हो उठा है। बता दें कि 1890 मे स्वामी विवेकानंद जब हिमालय यात्रा पर निकले अल्मोड़ा में तो तीन नदियों के संगम काकड़ीघाट पर उन्हें खगोलीय तरंगों की अनुभूति हुई थी। जिसके बाद उन्होंने घाट पर स्नान किया और पास ही विशाल पीपल वृक्ष के नीचे ध्यान लगाकर बैठ गए।
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इन्होंने दिया था स्वामी विवेकानंद को ज्ञान, अब सालों बाद फिर हो गए जीवित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 15 Jan 2018 08:48 AM IST
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clone of peepal tree
- फोटो : Dainik jagran
कहा जाता है इसी दौरान उन्हें विश्व व अणु ब्रह्मांड एक ही नियम की संरचना का आत्मज्ञान हुआ। 2010 की आपदा के बाद यह पीपल का पेड़ सूखने लगा था।
Pantnagar University
जिसके बाद 2015 में गोविंद बल्लभ पंत कृषि विवि पंतनगर के वैज्ञानिक इस पैतृक वृक्ष के जीवित तनों से कायिक कोशिकाओं को सुरक्षित कर प्रतिरूप(क्लोन) बनाने में जुटे। सफल प्रयोग के बाद क्लोन को उसी जड़ पर लगाया गया, जहां कभी पैतृक वृक्ष था।
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स्वामी विवेकानंद की जयंती
128 साल पहले जिस पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर स्वामी विवेकानंद ने ब्रह्मांड का ज्ञान प्राप्त किया था, वह पेड़ फिर से जीवित हो चुका है। प्राचीन पेड़ की कायनिक कोशिकाओं से तैयार क्लोन से यह संभव हुआ है।
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peeple tree
क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई के प्रभारी चंद्र सिंह चौहान ने बताया कि स्वामी विवेकानंद की स्मृतियों से जुड़े करीब 500 साल पुराने पीपल वृक्ष को नया जीवन देने में बड़ी सफलता मिली है। प्रतिरूप जड़ें जमा चुका हैं। क्लोन को उसी स्थान पर लगाया गया है, जहां पुराना पेड़ था।