पहले चीन ने सारी बारीकियां भारत से सीखी और फिर सभी देशों को पीछे छोड़ पहले पायदान पर पहुंच गया। पढ़िए खास रिपोर्ट...
{"_id":"5a5996bc4f1c1b62428b487a","slug":"china-beat-all-country-in-this-field","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"भारत से सीख लेकर यहां चीन ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, अमेरिका को भी पीछे छोड़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भारत से सीख लेकर यहां चीन ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, अमेरिका को भी पीछे छोड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 15 Jan 2018 08:48 AM IST
विज्ञापन
India China
- फोटो : डेमो फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
himalaya
हिमालयी क्षेत्र की बारीकियां भारत से सीखने के बाद चीन हिमालयी पर्यावरण पर शोध के मामले में पहले पायदान पर पहुंच गया है। चीन ने हिमालयी क्षेत्र की विविधताओं पर दुनिया में सबसे अधिक शोध कर लिए हैं। नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेस के फेलो और कुमाऊं विवि के पूर्व कुलपति हिमालयी विज्ञान के प्रोफेसर एसपी सिंह का कहना है कि चीन के विज्ञानियों ने शोध के मामले में अमेरिका को पीछे कर दिया है। तिब्बती पठार पर चीन ने सबसे अधिक काम किया है।
himalaya
हिमालयी क्षेत्र पर शोध के मामले में भारत वर्ष 1970 तक नंबर एक पर रहा है। इसके बाद चीन ने भारतीय विज्ञानियों के शोधों से ज्ञान लेकर खुद को आगे कर लिया है। चीन के शोध संस्थान कई भारतीय विज्ञानियों की सेवाएं ले रहे हैं। प्रोफेसर सिंह का कहना है कि चीन ने विभिन्न क्षेत्रों में शोध के मामले में अपना बजट बढ़ाया है। हिमालयी इकोलॉजी, संपदा और पर्यावरण से संबंधित शोध के मामलों में अमेरिका को पीछे छोड़ रहा है। उन्होंने बताया कि इस वक्त दुनिया में हुए बेहतरीन रिसर्च पेपर में चीन के शोध 70 फीसदी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
himalayan park
हिंदूकुश हिमालय के संबंध में सबसे अधिक जानकारी चीन को है। चीन ने इस समय शोध का बजट विश्व में सबसे अधिक कर दिया है। प्रोफेसर सिंह का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के दौर में हिमालयी क्षेत्र पर पूरे विश्व की निगाहें टिकी हैं। विज्ञानियों का कहना है कि हिमालय में ग्लेशियर और नदियों का उद्गम तो है ही, साथ ही इको सिस्टम सर्विसेस, दवाओं और काष्ठ आदि का कारोबार इससे जुड़ा हुआ है।
विज्ञापन
kailash mansarovar
ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस की दवा कंपनियां हिमालयी वनस्पतियों पर शोध करा रही हैं। इनका डाटा बेस तैयार किया जा रहा है। चीन ने हिमालयी क्षेत्र पर विशेष तवज्जो देनी शुरू कर दी है। अपनी सीमा के कैलाश-मानसरोवर क्षेत्र को चीन ने राष्ट्रीय विरासत घोषित कर दिया है।