देश की पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का उत्तराखंड से गहरा लगाव था। वे तीन अप्रैल 2000 से दो अप्रैल 2006 तक उत्तराखंड से राज्यसभा सदस्य रहीं थीं। इस दौरान उन्होंने उत्तराखंड के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य भी किए थे।
सुषमा स्वराज का मंगलवार को एम्स में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उनके निधन की खबर सुनते ही भारतीय जनता पार्टी के दिग्गजों में शोक की लहर दौड़ गई। जो कार्यकर्ता दिन में केंद्र सरकार द्वारा कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने को लेकर दिवाली मना रहे थे वे यह खबर सुनकर मायूस हो गए। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ट्वीट कर उनके निधन पर शोक जताया।
उन्होंने लिखा 'विदेश मंत्री सुषमा स्वराज जी के निधन की खबर से बेहद क्षुब्ध हूं। सुषमा जी का जाना देश के लिए अपूर्णीय क्षति है। हम सबने एक कुशल राजनेता,प्रखर वक्ता,और मानवीय संवेदनाओं से भरपूर व्यक्तित्व को खो दिया। ईश्वर से प्रार्थना है दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें।'
शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने बताया कि वे राज्यसभा सांसद रहते कई बार उत्तराखंड आई थीं। उन्होंने हरिद्वार में हर की पौड़ी के सौंदर्यीकरण समेत तमाम विकास कार्य कराए। भाजपा के जिला उपाध्यक्ष नरेश शर्मा के अनुसार सुषमा स्वराज ने हरिद्वार में कई जनसभाओं और पार्टी के सम्मेलन को संबोधित किया था।
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उत्तराखंड में सुषमा स्वराज
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वह पार्टी के कार्यकर्ताओं को अपने बच्चों की तरह स्नेह करती थीं। कौशिक ने कहा कि विदेश मंत्री रहते हुए उन्होंने भारत का पक्ष अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद मजबूती से रखा। कई बार जब भारतीय निवासियों पर विदेशों में रहते हुए संकट आया तो उन्होंने एक मजबूत नेता के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैरवी की।