यह महीना अत्यंत महत्वपूर्ण खगोलीय घटनाओं का साक्षी बनने जा रहा है। शुरुआत में पांच जून को चंद्रग्रहण पड़ रहा है तो 21 जून को सूर्यग्रहण भी होगा। इस बीच 20 जून को संक्रांति पड़ेगी, जब उत्तरी गोलार्ध में सबसे बड़ा दिन और सबसे छोटी रात होगी। कोरोना के इस दौर में सूर्यग्रहण के दिन आकाश में वास्तविक कोरोना भी नजर आएगा। हकीकत में कोरोना वायरस का नाम इसी खगोलीय घटना से आया भी है।
पांच जून यानी आज इस वर्ष का दूसरा चंद्रग्रहण पड़ेगा जो रात 11:16 बजे से शुरू होकर छह जून की सुबह 2:32 बजे तक चलेगा। रात 12:54 पर यह चरम पर होगा। हालांकि यह एक उपच्छाया ग्रहण है जिसमें चांद पूरा या आंशिक रूप से भी अदृश्य नहीं होता केवल उसकी चमक कुछ फीकी पड़ जाती है जबकि आकार वही रहता है।
यह ग्रहण पूरे भारत के साथ ही यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, दक्षिण पूर्व अमेरिका में भी नजर आएगा। 20 जून को संक्रांति पड़ेगी जब उत्तरी गोलार्ध में सबसे बड़ा दिन होगा और देश में लगभग 15 घंटे उजाला रहेगा। पखवाड़े की सबसे रोचक घटना 21 जून के सूर्यग्रहण की होगी जब पूरा सूर्य चांद के पीछे छिप जाएगा और केवल इसकी बाहरी परत यानी कोरोना नजर आएगी। यह ग्रहण उत्तर भारत में नजर आएगा और पूर्वोत्तर में अधिकतम 38 सेकंड के लिए पूरा सूर्य चांद के पीछे चला जाएगा।
21 जून को सूर्य का कोरोना नजर आएगा। यह रिंगनुमा गोल आकृति है, इसके चारों ओर से बाहर को निकलती ज्वाला जैसी नजर आती है। इससे किरीट यानी मुकुट को कोरोना नाम मिला, जिसमें गोलाई लिए बाहर को निकली आकृतियां बनी होती हैं और ऐसी ही आकृति का होने के कारण इस वायरस को भी यह नाम दिया है।
यह एक तथ्य है कि सूर्यग्रहण कभी भी अकेले नहीं आता। इसके दो सप्ताह आगे या पीछे और कभी-कभी दोनों ही 15 दिन के अंतराल में चंद्रग्रहण भी पड़ते हैं। आर्य भट्ट शोध एवं प्रेक्षण विज्ञान संस्थान (एरीज) के वैज्ञानिक डॉ. शशि भूषण पांडे के अनुसार इस वर्ष तीन ग्रहण एक साथ पड़ रहे हैं। तीसरा चंद्रग्रहण पांच जुलाई को पड़ेगा।