उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में बारिश के कारण मलबा आने से आम जनता के लिए ही नहीं स्कूली बच्चों के लिए भी मुसीबत खड़ी हो गई है। सड़कों पर बोल्डर गिरने से और मलबा आने से गांव के रास्ते बंद हो गए हैं। ऐसे में बच्चे खतरों के बीच ही आवागमन करने को मजबूर हैं।
बारिश से सड़कें हुई बंद, तो जान हथेली पर रखकर आवागमन कर रहे स्कूली बच्चे, तस्वीरें...
मुनस्यारी में भारी बारिश के चलते बोथी गांव से कारगिल शहीद हरीश दानू राइंका उच्छैती को जोड़ने वाला संपर्क मार्ग ध्वस्त हो गया है। भूस्खलन से चट्टानें दरक गई हैं। इसके चलते गांव के बच्चे जान जोखिम में डालकर स्कूल जा रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र खतरा बने मार्ग को दुरुस्त करने की मांग की है। वहीं पिथौरागढ़ में 108 एंबुलेंस मबले में फंस गई। जिसके बाद महिला का एंबुलेंस में ही प्रसव कराना पड़ा।
#WATCH Pithoragarh: Heavy rainfall followed by landslides hampers road connectivity in Goripur area of Munsyari. Students from Bothi village cross landslide-affected route to reach their college in Uchhaiti. #Uttarakhand pic.twitter.com/IWpzmUlsQ5
वहीं गढ़वाल के चमोली जिले में भी रुक-रुककर हो रही बारिश से कई सड़कें बंद हो गई हैं तो बदरीनाथ हाईवे के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने वाले संपर्क मार्ग जानलेवा बने हैं। बिरही-निजमूला, मठ-झड़ेता, मेठाणा-सरतोली, गोपेश्वर-हापला मोटर मार्ग मलबा आने से बंद होने से ग्रामीणों को कई किमी पैदल आवाजाही करनी पड़ रही है।
बारिश से मठ-झड़ेता मोटर मार्ग पर रसोई गैस गोदाम की नवनिर्मित दीवार क्षतिग्रस्त होने से आम लोगों के साथ ही स्कूली छात्र-छात्राओं को भी जान हथेली पर रखकर आवाजाही करनी पड़ रही है। यहां एसडीएम बुसरा अंसारी ने मठ-झड़ेता मार्ग का निरीक्षण किया और शीघ्र सड़क खोलने के लिए जेसीबी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
बैमरु गांव के पूर्व प्रधान रविंद्र नेगी ने बताया कि गैस गोदाम की आधी झुकी क्षतिग्रस्त दीवार से भी खतरा बना हुआ है। पुरसाड़ी-पलेठी सड़क गरमथा तोक में क्षतिग्रस्त होने से छोटे वाहनों की आवाजाही भी नहीं हो पा रही है। ग्रामीण करीब सात किलोमीटर की पैदल दूरी तय कर गंतव्य को जा रहे हैं। बिरही-निजमूला सड़क क्षतिग्रस्त होने से क्षेत्र के 15 गांवों के ग्रामीणों को आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।