उत्तराखंड बोर्ड परिणामों में गरीबी इन होनहारों के सामने बाधा नहीं बन सकी। तमाम संघर्षों को हंसते-हंसते झेलने के बाद आखिरकार इन्होंने सफलता का परचम लहरा दिया। अपना घर आश्रम में रहने वाली यामिनी दसवी कक्षा में 71 प्रतिशत अंक लाई तो अनाथ आश्रम के सभी बच्चों ने उसे बधाई दी। यामिनी एक साल पहले कोटद्वार से दून आई थी। यामिनी को माता-पिता के रूप में नाजिया और इलियाज मिले। यामिनी को माजरी माफी स्थित राजकीय इंटर कॉलेज में दाखिला दिलाया गया। यामिनी की पारिवारिक स्थिति कुछ ऐसी थी कि वह हमेशा दहशत में रहती थी लेकिन आश्रम में बच्चों और बड़ो से मिले प्यार के बाद वह सब भूलती चली गई।
उत्तराखंड बोर्ड में छाए गुदड़ी के लाल, इनका संघर्ष सुन करेंगे सलाम
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struggle of uttarakhand board toppers
नैनीताल के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय शहीद सैनिक स्मारक विद्यापीठ (निशांत) की छात्रा अंजली मठपाल ने हाईस्कूल की मेरिट में 500 में से 468 अंक (93.6 फीसदी) हासिल कर 16वां स्थान हासिल किया है। 2005 में हाईस्कूल बने इस स्कूल में अंजली पहली छात्रा है, जिसने मेरिट में जगह बनाई है। मूल रूप से नैनीताल के पास गेठिया गांव निवासी अंजली के पिता गोविंद सिंह मठपाल नैनीताल में बिड़ला चुंगी के पास पाइन गार्डन में केयर टेकर और कुक का काम करते हैं। जबकि दीपा मठपाल गृहणी हैं। अंजली अपनी मां दीपा मठपाल को प्रेरणास्रोत मानती हैं।
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आनंद, अमित
- फोटो : amar ujala
उत्तराखंड बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा में 90 फीसदी अंक लाने वाले आनंद किशोर और जेईई मेन्स परीक्षा में सफल रहने अमित रतूड़ी जैसे बेटों की चाहत हर किसी को होगी। इन गुदड़ी के लालों की सफलता से उनके माता-पिता प्रफुल्लित हैं। आनंद की प्राथमिकता प्रशासनिक सेवा में जाने की है। जबकि अमित आईआईटी कर इंजीनियरिंग के क्षेत्र में जाना चाहते हैं। दोनों होनहारों ने राजकीय इंटर कालेज पौड़ीखाल सहित पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। आनंद के पिता इंदूभूषण रतूड़ी गांव में खेतीबाड़ी कर परिवार चलाते हैं। मां सरला गृहणी हैं।
उत्तराखंड बोर्ड में छाए गुदड़ी के लाल, इनका संघर्ष सुन करेंगे सलाम
उत्तराखंड बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा में 94 फीसदी अंक पाकर प्रदेश की मेरिट में 14 वें स्थान पर रही दून निवासी निकिता गरीब पारिवारिक पृष्ट भूमि से पढ़ी बढ़ी। इस छात्रा ने बोर्ड परीक्षा के दौरान घर के काम काज में मां बसंती देवी का हाथ बटाने के साथ ही डोर टू डोर गैस लाइटर एवं इमरजेंसी लाइट आदि सामान बेचकर परिवार का गुजारा करने वाले पिता के काम में भी हाथ बटाया। वाणी विहार अधोईवाला निवासी निकिता के पिता उदल सिंह बताते हैं कि निकिता पर दोहरी जिम्मेदारी है।
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मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है। इसे साबित कर दिखाया है राजकीय इंटर कालेज मुंडाखेड़ा कलां की छात्रा कुमारी फरीदा ने। इसने उत्तराखंड बोर्ड की 12वीं में 452 अंक (90.40 प्रतिशत) हासिल कर प्रदेश में 18वीं रैंक और जिला टॉप किया है। उत्तराखंड बोर्ड की 12वीं परीक्षा में जिला टॉप करने वाली मुंडाखेड़ा निवासी कुमारी फरीदा के पिता एक मामूली किसान हैं। जबकि इसके दो भाई दिनभर मेहनत-मजदूरी कर घर के खर्च में हाथ बंटवाते हैं। बहन के स्कूल का खर्च भी दोनों भाई उठाते हैं।