तीर्थपुरोहितों को पूरा विश्वास था की दिवंगत फिल्म अभिनेत्री की अस्थियों को यहां लाया जाएगा। पर जानते है क्यों? पढ़िए क्या थी वजह...
दिवंगत फिल्म अभिनेत्री की अस्थियों की प्रतीक्षा की जा रही थी, ताकि कपूर परिवार की परंपराओं के अनुसार उनका विर्सजन हरकी पैड़ी पर किया जा सके, लेकिन श्रीदेवी की अस्थियों का विसर्जन रामेश्वरम में किया गया, लेकिन हरिद्वार में तीर्थपुरोहितों को पूरा भरोसा था कि उनकी अस्थियां यहां लाई जाएगी। इसके पीछे की वजह ...
श्रीदेवी के पति बोनी कपूर और पूरा कपूर खानदान मूल रूप से पाकिस्तान के पेशावर शहर के निवासी हैं। पृथ्वीराज कपूर से लेकर कूपर परिवार की तमाम अस्थियां हरिद्वार आई हैं और उनके पुरोहित पंडित शिव कुमार पालीवाल ने कर्मकांड संपन्न कराए।
बोनी कपूर और राजकूपर दोनों के ही परिवार पेशावर शहर के रहने वाले हैं, किंतु दोनों परिवारों के बीच कोई रिश्ता नहीं है। बोनी कपूर परिवार से ऋषिकेश परमार्थ निकेतन के मुनि चिदानंद के गहरे संबंध हैं। वे या अनिल कपूर जब भी हरिद्वार आए उन्हीं के पास कर्मकांड करने पहुंचे। अलबत्ता उन्होंने अपने पुरोहित को ऋषिकेश अवश्य बुलाया। उनकी बही में नाम भी दर्ज कराया।
पिछली बार हरिद्वार के पुरोहितों की ओर से कड़ा विरोध करने पर मुनि चिदानंद ने हरिद्वार आकर बाकायदा घोषणा की थी कि वे अब कभी भी ऋषिकेश में अस्थि प्रवाह नहीं कराएंगे। शास्त्रों के अनुसार हरकी पैड़ी पर ही अस्थि प्रवाह के लिए लाया जाएगा।