बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के पहले जानिए एक ऐसी भविष्यवाणी के बारे में जिसके बाद श्रद्धालु भगवान बदरी नारायण के दर्शन नहीं कर पाएंगे। कहा जाता है कि एक दिन ऐसा आएगा जब इस विश्व विख्यात प्रसिद्ध धाम के रास्ते बंद हो जाएंगे। जनश्रुतियों की मानें तो ऐसा नृसिंह देवता की भविष्यवाणी के कारण होगा।
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कह जाता है कि उत्तराखंड में चमोली जिले के जोशीमठ स्थित मंदिर में मौजूद नृसिंह भगवान की मूर्ति की दाहिनी भुजा के कारण बदरीनाथ धाम लुप्त हो जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि भगवान नृसिंह भगवान की मूर्ति में हर साल 'हैरतअंगेज' बदलाव हो रहा है।
केदारखंड के सनत कुमार संहिता में कहा गया है कि भगवान नृसिंह की बायीं भुजा की कलाई धीरे-धीरे पतली होती जा रही है। जब भगवान नृसिंह की मूर्ति से उनका हाथ टूट कर गिर जाएगा तो विष्णुप्रयाग के समीप पटमिला नामक स्थान पर स्थित जय व विजय नाम के पहाड़ आपस में मिल जाएंगे और बदरीनाथ के दर्शन नहीं हो पाएंगे।
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बताते हैं कि आठवीं सदी में आदि गुरू शंकराचार्य ने ही भविष्य बदरी मंदिर की स्थापना की थी। भविष्य बदरी मंदिर के समीप ही एक पत्थर पर शंकराचार्य ने भविष्णवाणी भी लिखी है। जिस भाषा में भविष्यवाणी लिखी गई है, उसे आज तक कोई नहीं पड़ पाया है।
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बता दें कि मंगलवार को बदरीनाथ धाम के कपाट दोपहर 3 बजकर 21 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। सोमवार को भगवान बदरीनाथ के दर्शनों के लिए लगभग चार हजार से ज्यादा तीर्थयात्री और स्थानीय श्रद्धालु बदरीनाथ धाम पहुंच गए हैं।