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शंकराचार्य का भाजपा सरकार पर हमला, हिंदुओं की नहीं नास्तिकों की है ये सरकार

Sun, 11 Jun 2017 06:00 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार Updated Sun, 11 Jun 2017 06:00 PM IST
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shankaracharya attack on BJP government
स्‍वरूपानंद। - फोटो : अमर उजाला

जोशीमठ में पूर्णागिरी मंदिर परिसर में अनशन पर बैठे शंकराचार्य के शिष्य दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को जबरदस्ती उठाए जाने पर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने भाजपा शासित राज्य सरकार को नास्तिकों की सरकार बताया। उन्होंने कहा कि पूजा की मांग कर रहे एक संत पर लाठीचार्ज करना किस संविधान में है।

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शंकराचार्य - फोटो : amarujala
शंकराचार्य ने कहा, उन्हें पूरी रात एंबुलेंस में घुमाया और सुबह एम्स में भर्ती किया। जहां उनका उपचार भी सही तरीके से नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि ज्योर्तिमठ किसी की वसीयत के आधार पर नहीं चलता, बल्कि उसके संचालन का अधिकार शंकराचार्य को है। कोर्ट भी निर्णय दे चुका है कि उनके अलावा किसी को शंकराचार्य नहीं माना जा सकता, लेकिन राज्य सरकार उनके निर्देशों को नहीं मान रही है
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अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती

दरअसल, बदरीनाथ की यात्रा से लौटे कनखल स्थित मठ में पत्रकारों से वार्ता करते हुए शारदा एवं ज्योर्तिपीठाधीश्वर जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि मठ, मंदिर, तालाब, कुआं, नदी पर सभी का अधिकार है, लेकिन सरकार ने पूजा की मांग कर रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को जबरन उठा लिया।

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शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती

उन्होंने राज्य सरकार से सवाल उठाया कि वे कौन सी अनुचित मांग कर रहे थे कि जिसे मानने में दिक्कतें आ रही थी और लाठी चार्ज करनी पड़ी। वहां के निवासी भी मंदिर में पूजा की मांग कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि एक साधु के इशारे पर सरकार संतों के साथ ऐसा दुर्व्यवहार कर रही है।

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शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती

उन्होंने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद कब्जे की बात नहीं, बल्कि पूजा की बात कर रहे थे। ज्योर्तिमठ का संविधान है कि पूर्णागिरी और नृसिंह देवता का मंदिर उनके अधीन है, तो फिर पूर्णागिरी मंदिर में पूजा से क्यों वंचित किया जा रहा है। अविमुक्तेश्वरानंद छह जून से अनशन पर थे, लेकिन उनकी तीन दिन की चेतावनी के बाद मंदिर का ताला नहीं खोला तो उन्होंने पानी लेना भी छोड़ दिया।

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