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पहाड़ों के बीच बसे मंदिर में उगे इस पौधे की 'शक्ति' ने विज्ञान को किया हैरान

Sat, 11 Nov 2017 06:41 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 11 Nov 2017 06:41 PM IST
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scientist became shocked after seeing power of this plant
रिसर्च - फोटो : demo pic

पहाड़ों के बीच बसे मंदिर में उगे एक पौधे की 'शक्ति' से विज्ञान जगत हैरान है।  पौधे पर किए गए रिसर्च से जो तथ्य सामने आए हैं उन्हें जानने के बाद वैज्ञानिक जगत हैरान है।

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tulsi

वैज्ञानिक तो बस इतना पता कर रहे थे कि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों का बदरी तुलसी पर क्या असर पड़ेगा? लेकिन नतीजों ने उन्हें चौंका दिया कि हजारों साल पहले हिमालय की बर्फीली वादियों में उपजी और ठंडे माहौल में रहने की आदी बदरी तुलसी अधिक कार्बन तो सोखेगी ही, तापमान बढ़ने पर और बलवती हो जाएगी।

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badri tulsi

चारधाम आने वाले सैलानी और श्रद्धालु बदरी तुलसी को प्रसाद के रूप में अपने घर ले जाते हैं। क्षेत्रीय लोगों ने इसे भगवान बदरी विशाल को समर्पित कर दिया है। कोई भी इसके पौधों को हानि नहीं पहुंचाता। सिर्फ श्रद्धालु इसे प्रसाद ग्रहण करने की भावना से तोड़ते हैं।

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बदरी तुलसी इतने बड़े पैमाने पर सिर्फ बदरीनाथ धाम में ही मिलती है। पुराणों में इसके औषधीय गुणों का खूब बखान किया गया है। लोग इसकी चाय भी पीते हैं। लेकिन जलवायु परिवर्तन से पैदा हो रहे नए माहौल में इसके अन्य गुण भी उजागर हो गए हैं। जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से जड़ी-बूटियों के संरक्षण के लिए तैयार किए जा रहे डाटा बेस के तहत पहली बार विज्ञानियों ने बदरी तुलसी पर परीक्षण किया। इस देसी हिमालयी जड़ी के अंदर जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने की अद्भुत क्षमता पाई गई।

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श‌िव पूजा में तुलसी - फोटो : tulsi shiv puja

वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) की इकोलॉजी, क्लाइमेट चेंज एंड फॉरेस्ट इन्फ्सुएंस डिवीजन ने अपने ओपन टॉप चैंबर में इस पर परीक्षण किया। इसमें पाया गया कि सामान्य तुलसी और अन्य पौधों से इसमें कार्बन सोखने की क्षमता  12 फीसदी अधिक है। तापमान अधिक बढ़ने पर इसकी क्षमता 22 फीसदी और बढ़ जाएगी। इसका पौधा 5-6 फुट लंबा हो जाता है। पौधे एक कै नोपी (छतरी) की शक्ल बना लेते हैं, जिससे यह अधिक कार्बन सोख लेती है।

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