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यहां मिली 150 साल का इतिहास समेटे 24 पांडुलिपियां, दो राजाओं के शासनकाल का है उल्लेख, तस्वीरें...

Wed, 10 Jul 2019 10:24 AM IST
अलका त्यागी मनोहर बिष्ट, अमर उजाला, पौड़ी
मनोहर बिष्ट, अमर उजाला, पौड़ी Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 10 Jul 2019 10:24 AM IST
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Rare manuscripts of garhwal 150 years History found in uttarakhand pauri
पांडुलिपि - फोटो : अमर उजाला

उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल के रुद्रप्रयाग जिले के एक गांव में 24 पांडुलिपियां मिली हैं। इन पांडुलिपियों में गढ़वाल के 150 वर्षों का इतिहास, समकालीन घटनाएं, धर्म, संस्कृति, नाथपंथी साहित्य और आयुर्वेद पर विस्तार से लिखा गया है।

Rare manuscripts of garhwal 150 years History found in uttarakhand pauri
पांडुलिपि - फोटो : अमर उजाला

रुद्रप्रयाग जिले में तल्ला नागपुर स्थित सुपुरी गांव में प्रसिद्ध इतिहासकार व पांडुलिपि विशेषज्ञ डा. यशवंत कठोच के पास सुरक्षित हैं। ये पांडुलिपियां गढ़वाल की राजधानी श्रीनगर व सुपुरी गांव में लिखी गई हैं, जिससे रचनाकार और राजशाही परिवार के बीच घनिष्ठता के प्रमाण मिलते हैं। पांडुलिपियां सुपुरी के स्व. हीरा सिंह बड़त्वाल के पौत्र सत्येंद्र सिंह बड़त्वाल के पास सुरक्षित हैं। 

Rare manuscripts of garhwal 150 years History found in uttarakhand pauri
पांडुलिपि - फोटो : अमर उजाला

इनकी खोज में सत्येंद्र सिंह का भी विशेष सहयोग रहा है। डा. कठोच ने बताया कि सुपुरी गांव में पांडुलिपियों की खोज जारी है। इससे पहले की गई खोज में 15 पांडुलिपियां मिली थी। उन्होंने बताया कि इन पांडुलिपियों में राजा प्रदीप शाह से पृथ्वीपति शाह के शासनकाल का इतिहास लिखा गया है। संभवत: पृथ्वीपति शाह के शासनकाल की यह पहली पांडुलिपि है, जो गढ़वाल के इतिहास का दस्तावेज होने के साथ इतिहास की जानकारी को और भी अधिक समृद्ध बनाती हैं।

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Rare manuscripts of garhwal 150 years History found in uttarakhand pauri
पांडुलिपि - फोटो : अमर उजाला

इतिहासकार डा. कठोच ने बताया कि सुपुरी गांव के बड़त्वाल परिवार में 17वीं शताब्दी से ही धर्म, काव्य, आयुर्वेद पर लिखने वाले पुरुष रहे हैं। उनकी रचनाओं का संग्रह इतिहास की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण हैं। रचनाओं से आयुर्वेद में उनकी विशेषज्ञता मुखर रुप से प्रमाणित हो रही है। उन्होंने बताया कि पंवार वंश के इतिहास में एक पिटारा अभी भी अछूता है। डा. यशवंत कठोच ने राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन की ओर से इस दिशा में ठोस कार्य किए जाने पर जोर दिया है। 

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Rare manuscripts of garhwal 150 years History found in uttarakhand pauri
पांडुलिपि - फोटो : अमर उजाला

तल्ला नागपुर के सुपुरी गांव में मिली पांडुलिपियां तीन भाषाओं में रची गई हैं। पुरानी हिंदी, संस्कृत व गढ़वाली भाषा में पांडुलिपियों की रचना की गई हैं। इतिहासकार डा. कठोच को मिली पांडुलिपियों में आयुर्वेद के कई रहस्य समाए हुए हैं। इन पांडुलिपियों में एक भाव प्रकाश नामक पांडुलिपि है, जिसमें आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति की अनेक अनछुई पद्धतियों पर विस्तार से लिखा गया है। इतिहासकार डा. कठोच के मुताबिक सुपुरी गांव में राजशाही दौर के अनेक अस्त्र-शस्त्र भी हैं, इनमें तोप की नली, तीर और अनेक प्रकार के समकालीन खंजर शामिल हैं। 

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