देवोत्थान एकादशी से विवाहों को सीजन प्रारंभ हो चुका है। इसके बावजूद विवाह बहुत कम हो रहे हैं। देव जागरण के बाद विवाहों पर कोई पाबंदी नहीं होती। ग्रहों के देवता बृहस्पति के अस्त होने से विवाह अपने पूर्ण रंग में नहीं आ पा रहे हैं।
पंडित प्रतीक मिश्रपुरी ने बताया कि विवाहों का शुक्र और गुरु से सीधा रिश्ता है। मुख्य संबंध देव जागरण से है। देव जागरण के बाद भी यदि शुक्र या गुरु में से कोई ग्रह अस्त हो, तो विवाह नहीं होते। विवाहों में गुरु की मौजूदगी बहुत जरूरी है। नवग्रह पूजन बृहस्पति के बगैर पूरा नहीं हो सकता।
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पिछले लंबे अरसे से शुक्र उदित हो चुके है, लेकिन गुरु अभी भी अस्त है। इस बार गुरु के पश्चिम में अस्त होने के कारण 19 नवंबर देव जागरण के दिन के अलावा दस दिसंबर तक विवाह मुहूर्त नहीं हैं। गुरु जागरण मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन सात दिसंबर को होगा।
इस बार गुरु पूर्व दिशा से अवतरित होंगे, अत: उनके अवतरण के तत्काल बाद विशेष मांगलिक योग पड़ेंगे। इन योगों में दिस दिसंबर से विवाहों का शुभारंभ होगा। 12 दिसंबर को विवाह का सर्वसिद्ध योग पड़ रहा है। इसी दिन श्रवण नक्षत्र में भगवान राम जानकी का विवाहोत्सव में भी मनाया जाएगा।
12 दिसंबर को राम विवाहोत्सव के कारण देश में हजारों विवाह होंगे। मुहूर्त की दृष्टि से विवाहों का यह सीजन अलबत्ता फीका रहेगा। पांच महीनों में विवाहों के कुल 25 मुहूर्त पड़ने से बैंड-बाजे कम बजेंगे। परिणाम स्वरूप 19 नवंबर को बिन सुझाहे विवाहों के बाद फिर दस दिसबंर तक कोई भी मुहूर्त नहीं है।