स्वीडन के 16वें राजा कार्ल गुस्ताव और महारानी सिल्विया शुक्रवार को रामनगर में जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क घूमने के लिए गए थे। इस दौरान वे अचानक एक वन गुज्जर के घर चले गए। पत्थरकुआं स्थित गुज्जर बस्ती में जाकर वनों में निवास कर रहे गुज्जरों के जीवन यापन के बारे में जानकारी ली।
अब्दुल रहमान नामक गुज्जर के झाले पर पहुंचे राजा और रानी का गुज्जरों ने कम्बल व हाथ से बने पंखे देकर स्वागत किया गया। ये तोहफा देख वे बेहद खुश नजर आए। शाही जोड़े ने गुज्जरों से उनकी दिनचर्या, कारोबार, बच्चों की शिक्षा के बारे में विस्तार से जानकारी ली।
इस दौरान दूध की खीर देखकर रानी सिल्विया ने खीर खाने की इच्छा व्यक्त की, जो कि सुरक्षा कारणों से पूरी नहीं हो सकी। गुज्जरों ने उन्हें बताया कि पशुपालन से ही उनकी आजीविका चलती है। जंगल में बच्चों की शिक्षा का कोई प्रबंध नहीं है। बीते 18 साल से सरकार से अपने विस्थापन की मांग कर रहें हैं, लेकिन उनका विस्थापन आज तक नहीं किया गया।
शाही जोड़े ने उनके बच्चों की शिक्षा का प्रबंध न होने पर दुख व्यक्त करते हुए इस बाबत मदद दिये जाने का भरोसा दिलाया। स्वीडन से आये शाही जोड़े ने शुक्रवार को कॉर्बेट पार्क की दिलकश वादियों का नजारा करते हुए पार्क की नैसर्गिक सुन्दरता की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
शुक्रवार की सुबह साढ़े 6 बजे पार्क के झिरना जोन में स्वीडन के राजा कार्ल गुस्ताव व महारानी सिल्विया ने स्वच्छन्द विचरण कर रहे वन्यजीवों के नजारे को करीब से निहारा। इस दौरान उनके साथ कॉर्बेट प्रशासन, नागरिक प्रशासन, पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इसके बाद वे पंतनगर एयरपोर्ट से वापस दिल्ली के लिए रवाना हो गए।