प्रियंका गांधी वाड्रा को संगठन में अहम जिम्मेदारी से कांग्रेस में हर कोई झूम सा रहा है। पार्टी की कायाकल्प की उम्मीद सिर चढ़कर बोल रही है। इन स्थितियों के बीच एक और खास बात है। वो जुड़ी है प्रियंका की तटस्थता से।
2 of 8
pritam singh
- फोटो : अमर उजाला
उत्तराखंड से खास लगाव के बावजूद प्रियंका ने राज्य के हर नेता से समान दूरी बनाकर रखी है। इस वजह से उत्तराखंड का कोई बड़ा नेता यह कहने की स्थिति में नहीं है कि उसे प्रियंका से खास तवज्जो मिलेगी। वैसे, प्रियंका के पार्टी में सक्रिय होने के बाद उत्तराखंड कांग्रेस को यह उम्मीद जरूर है कि युवाओं और महिलाओं का जुड़ाव अब पार्टी से और ज्यादा बढे़गा।
3 of 8
प्रियंका गांधी
- फोटो : पीटीआई
उत्तराखंड कांग्रेस शुरू से गुटबाजी का शिकार रही है। इसके किरदार बदलते रहे हैं, लेकिन प्रवृत्ति एक सी रही है। उत्तराखंड राज्य निर्माण के बाद 2017 के विस चुनाव में कांग्रेस ने सबसे खराब वक्त देखा, जबकि सत्ता से सीधे फिसलकर वह सिर्फ 11 विधायकों के संख्या बल पर सिमट गई। निश्चित तौर पर कांग्रेस इस हार से उबरने की अब भी कोशिश कर रही है। ऐसे समय में उत्तराखंड कांग्रेस को लगता है कि प्रियंका की सक्रियता राज्य में पार्टी के बहुत काम आएगी। हालांकि उन पर राष्ट्रीय महासचिव रहते हुए उत्तर प्रदेश का प्रभार भी है, लेकिन उसका असर कहीं न कहीं उत्तराखंड में पड़ने की उम्मीद भी कांग्रेस के लोग करते हैं।
अखिल भारतीय कांग्रेस में प्रियंका गांधी वाड्रा के समकक्ष हरीश रावत का मानना है कि असर जल्द दिखने लगेगा। वह ये भी नहीं मानते कि प्रियंका देर से कांग्रेस में सक्रिय हुई है। वह कहते है-सही समय पर सही निर्णय लिया गया है, इसके बाद अब भाजपा को अपनी रणनीति बदलनी पडे़गी। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह का कहना है कि वह यूपी के जमाने में 1993 में विधायक रहे थे। प्रियंका को लेकर उत्तर प्रदेश उत्तराखंड में शुरू से असाधारण क्रेज रहा है। कांग्रेस की मजबूती का यह आधार साबित होगा।
वैसे, कांग्रेस के लोग कहते हैं कि प्रियंका के उत्तराखंड के दिग्गज नेताओं से समान दूरी बनाए रखने का फैसला बहुत उचित रहा है। ऐसा न होता, तो उत्तराखंड कांग्रेस की गुटबाजी का रूप और भयावह होता। यही कारण है कि प्रियंका के सक्रिय होने पर कोई दिग्गज नेता अपने को खास तवज्जो मिलने की उम्मीद नहीं कर सकता। यह अलग बात है कि राष्ट्रीय महासचिव बनने के बाद अब उनका नेताओं से सीधे संपर्क होगा और पसंद, न पसंद अब उभरकर सामने आने लगेगी।