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Exclusive interview: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम बोले, सौम्यता को मेरी कमजोरी मत समझना

Sun, 14 May 2017 09:24 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 14 May 2017 09:24 AM IST
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Pritam Singh exclusive interview with amarujala
pritam singh - फोटो : amarujala

चकराता विधानसभा से लगातार चार बार चुनाव जीते पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रीतम सिंह ने प्रदेश कांग्रेस के नए अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। ऐसे कठिन वक्त में प्रीतम के सामने संगठन के भीतर नया आत्मविश्वास पैदा करने की चुनौती तो है ही, वहीं उन्हें आने वाले समय में एक के बाद एक चुनावी परीक्षाओं से भी गुजरना है।



सांगठनिक खेमेबाजी के बीच खुद को तटस्थ बनाने की चुनौती भी उनके सामने है। जनाधार वाले अनुभवी राजनीतिज्ञ होने के बावजूद प्रीतम का मुखर व्यक्तित्व न होना उनकी कमजोरी के तौर पर देखा जा रहा है। मगर इस पर प्रीतम सिंह कहते हैं, ‘राजनीति में सौम्य होना क्या कोई गुनाह है? 

कहा, मेरी सौम्यता को कोई मेरी कमजोरी न समझे। चुनौतियों के चक्रव्यूह से घिरे प्रीतम सिंह की संगठन को खड़ा करने की क्या कार्ययोजना है, इन तमाम मसलों पर अमर उजाला के मुख्य संवाददाता राकेश खंडूड़ी के साथ उनकी बातचीत के प्रमुख अंश पढ़ें।

जरूरी नहीं तेज ध्वनि में कही बात सच हो

Pritam Singh exclusive interview with amarujala
pritam singh

सवाल: प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर नई जिम्मेदारी को आप कैसे देखते हैं?
जवाब: मैं आभारी हूं सोनिया जी का, राहुल जी का, जिन्होंने मुझ पर भरोसा किया। मैं उनके भरोसे पर पूरी तरह से खरा उतरने की कोशिश करूंगा। ऐसे वक्त में उन्हें यह दायित्व दिया गया है, जिसमें चैन से बैठने की कोई गुंजाइश नहीं। 

सवाल: मगर आपको मुखर राजनेता नहीं माना जाता। आक्रामक विपक्ष की भूमिका कैसे निभाएंगे?
जवाब: जरूरी नहीं कि तेज ध्वनि में कही गई हर बात सही हो। मुद्दा सही और जनता के हित में होना चाहिए, उसे सौम्यता से भी उठाएंगे तो वह असर दिखाएगा। ऐसा हम विस के भीतर कर चुके हैं। महंगाई, शराब और रंगदारी के मुद्दे पर सरकार हमारे सवालों का जवाब नहीं दे पाई।

कांग्रेस हारी जरूर पर समाप्त नहीं हुई

Pritam Singh exclusive interview with amarujala
pritam singh

सवाल: मगर कांग्रेस आज सबसे बड़े संकट में है और उसे जोशीले नेतृत्व की दरकार है?
जवाब: विधान सभा चुनाव में कांग्रेस की बुरी पराजय को मैं स्वीकारता हूं। मगर कांग्रेस हारी जरूर है, समाप्त नहीं हुई है। चुनौतियां आती हैं। हम लड़ेंगे, जूझेंगे और फिर से खड़े होंगे। जहां तक मेरे व्यक्तित्व का मसला है तो मेरी सौम्यता को कोई कमजोरी न समझे। मीडिया आजकल उसे ही नेता मानती है जो बार-बार और विवादित बयान देता है। मैं मर्यादा में रहकर बयानबाजी में विश्वास करता हूं। 

सवाल: आपकी छवि चकराता तक केंद्रित रहने वाले नेता की भी है, इस छवि को कैसे तोड़ेंगे?
जवाब: यह छवि मीडिया ने गढ़ी है। मैं चकराता के लोगों का एहसानमंद हूं कि उन्होंने मुझ पर भरोसा किया। मैं पूरे प्रदेश में घूमा। लोगों से कभी नहीं पूछा कि वे किस जगह से आए हैं, जिसकी शिकायत वाजिब लगी, उसे हल करने की कोशिश की। इन सबके बावजूद यदि मेरी छवि ऐसी बनाई गई है तो इसमें मेरा क्या दोष है?

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यहां लोग आते हैं, जाते हैं लेकिन विचारधारा नहीं बदलती

Pritam Singh exclusive interview with amarujala
pritam singh - फोटो : amarujala

सवाल: आपको कांग्रेस की कमान सौंपना क्या पार्टी में नए युग की शुरुआत माना जाए?
ये कांग्रेस में नए युग की बात नहीं है। कांग्रेस विचारधारा वाली पार्टी है। सदमे झेले हैं। यहां लोग आते हैं, जाते हैं, लेकिन विचारधारा नहीं बदलती। आज वह अध्यक्ष हैं, कल ये जिम्मेदारी किसी ओर को मिलेगी। 

सवाल: संगठन में खोया विश्वास लौटाने के लिए आपके पास क्या रणनीति है?
जवाब: पार्टी के सभी वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को साथ लेकर संगठन को मजबूत करने का प्रयास करूंगा। विपक्ष के रूप में संगठन का धारदार होना नितांत आवश्यक है। इसके लिये समूची पार्टी और उसके फ्रंटल संगठनों को सक्रिय किया जाएगा। 

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मेरा फोकस संगठन मजबूती है

Pritam Singh exclusive interview with amarujala
प्रीतम सिंह - फोटो : AmarUjala

सवाल: आपके सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
जवाब: मेरे सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी में खोया विश्वास लौटाना है। चुनावी परीक्षाएं भी हमारे सामने हैं। शहरी निकाय के चुनाव आएंगे। फिर पंचायत चुनाव और उसके बाद लोक सभा के चुनाव हैं। इन परीक्षाओं को मैं अवसर की तरह देख रहा हूं। 

सवाल: क्या पार्टी संगठन में परिवर्तन के आसार हैं?
जवाब: जी नहीं, संगठन चुनाव की प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है। अब जो भी बदलाव होंगे वह सांगठनिक चुनाव के दौरान ही होंगे। मेरा पूरा फोकस सांगठनिक चुनाव और सांगठनिक मजबूती पर है।

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