पुलिस ने खोला राज, ऐसा होता तो बच जाती भाजपा के कार्यक्रम में जहर खाने वाले फरियादी की जान
ठेकेदारों पर फंसी 11 लाख रुपये की रकम मिल जाती तो यह अनहोनी टल सकती थी। पुलिस ने कारोबार, ऋण और बैंक खातों को लेकर पांडेय की जो कुंडली तैयार की है, उसमें यह तथ्य प्रमुखता से दिया गया है। पांडेय ने कर्ज के बोझ से खुद को उबारने की अंतिम सांस तक कोशिश की, मगर हर तरफ से निराशा मिली तो जीवन की अंतिम राह आसान लगी।
हल्द्वानी के ट्रांसपोर्टर प्रकाश पांडेय के भाजपा मुख्यालय पर छह जनवरी को कृषि मंत्री सुबोध उनियाल के जनता दरबार में सल्फास का सेवन करने के बाद से खुफिया तंत्र और पुलिस पांडेय की कुंडली तैयार करने में जुटी थी। पांडेय की काल डिटेल के माध्यम से उन लोगों से बात की गई, जिनसे आखिरी दौर में उन्होंने बातचीत की। बस कंडेक्टर से लेकर ट्रांसपोर्टर तक के पूरे सफर को खंगाला गया।
हल्द्वानी में किराए पर रहने वाले ट्रांसपोर्टर के दो ट्रक और दो डंपर थे, जो ऋण पर लिए गए थे। बैंक खातों के अलावा ऋण का पूरा हिसाब-किताब लगाया गया। जुलाई से पांडेय बैंकों की किश्त नहीं दे पा रहे थे। बड़ी बात यह है कि कारोबार में घाटे के साथ उनकी रकम भी फंस गई थी।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक एक कंपनी पर उनकी तीन लाख रुपये और दूसरी पर करीब आठ लाख की रकम बकाया था, जो काफी दिनो से मिल नहीं पा रही थी। पांडेय ने कर्ज के बोझ से उबारने को पर्सनल ऋण लेने का भी प्रयास किया, मगर ऋण नहीं मिल पाया।