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पितृ पक्ष 2021: हरिद्वार में नारायणी शिला पर तर्पण के लिए उमड़ी भीड़, जानें क्या है इस जगह का महत्व, तस्वीरें...

Thu, 23 Sep 2021 10:03 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 23 Sep 2021 10:03 PM IST
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Pitru Paksha 2021: Devotees Crowd for Shradh In Narayan Shila Haridwar Photos
तर्पण के लिए नारायण शिला में उमड़ी भीड़ - फोटो : अमर उजाला

वैसे तो पितृ पक्ष में किसी भी धार्मिक स्थल पर श्राद्ध किया जा सकता है, लेकिन धर्मनगरी हरिद्वार के नारायणी शिला पर तर्पण करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। पुराणों में भी ऐसा उल्लेख मिलता है। यही कारण है कि पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म के लिए यहां देशभर के श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। बृहस्पतिवार को भी यहां बड़ी संख्या में लोगों ने गंगा स्नान कर पितरों के निमित्त तर्पण किया।



हिंदू धर्म में मान्यता है कि पितृपक्ष में 16 दिन तक पितृ पृथ्वी पर आते हैं, इसलिए इन दिनों लोगों को ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए, जिससे पितृ नाराज हों। हरिद्वार के मायापुर स्थित देवपुरा में स्थापित प्राचीन नारायणी शिला मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य मनोज कुमार ने बताया कि श्राद्ध पक्ष में नारायणी शिला पर पितरों के निमित्त कर्मकांड करने से उनको मुक्ति मिलती है।

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पितृ पक्ष के दौरान दुनियाभर से श्रद्धालुओं का यहां तांता लगा रहता है। इसके साथ ही बदरीनाथ में ब्रह्मा कपाली और गया में विष्णु पद मंदिर में श्राद्ध के दौरान पितरों का पूजन किया जाता है। 20 सितंबर से शुरू हुए पितृ पक्ष में हरिद्वार के नारायणी शिला पर कर्मकांड कराने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। बृहस्पतिवार को श्रद्धालुओं ने पितरों के निमित्त कर्मकांड कराया। 

Pitru Paksha 2021: Devotees Crowd for Shradh In Narayan Shila Haridwar Photos
तर्पण के लिए नारायण शिला में उमड़ी भीड़ - फोटो : अमर उजाला

कुशावर्त घाट को भगवान दत्तात्रेय की समाधि स्थली भी कहा जाता है। कहा जाता है कि इसी घाट पर पांडवों और श्रीराम ने अपने पितरों का पिंडदान किया था। इसीलिए यहां स्नान करने से पितरों को शांति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति भी होती है।

Pitru Paksha 2021: Devotees Crowd for Shradh In Narayan Shila Haridwar Photos
तर्पण के लिए नारायण शिला में उमड़ी भीड़ - फोटो : अमर उजाला

नारायणी शिला मंदिर के बारे में कहा जाता है कि एक बार जब गयासुर नाम का राक्षस देवलोक से भगवान विष्णु यानी नारायण का श्री विग्रह लेकर भागा तो नारायण के विग्रह का धड़ यानी मस्तक वाला हिस्सा श्री बद्रीनाथ धाम के ब्रह्मकपाली नाम के स्थान पर गिरा। उनके हृदय वाले कंठ से नाभि तक का हिस्सा हरिद्वार के नारायणी मंदिर में गिरा और चरण गया में गिरे।

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Pitru Paksha 2021: Devotees Crowd for Shradh In Narayan Shila Haridwar Photos
तर्पण के लिए नारायण शिला में उमड़ी भीड़ - फोटो : अमर उजाला

नारायण के चरणों में गिरकर ही गयासुर की मौत हो गई। यानी वहीं उसको मोक्ष प्राप्त हुआ था। स्कंद पुराण के केदार खंड के अनुसार, हरिद्वार में नारायण का साक्षात हृदय स्थान होने के कारण इसका महत्व अधिक इसलिए माना जाता है क्योंकि मां लक्ष्मी उनके हृदय में निवास करती है। इसलिए इस स्थान पर श्राद्ध कर्म का विशेष महत्व है।

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Pitru Paksha 2021: Devotees Crowd for Shradh In Narayan Shila Haridwar Photos
तर्पण के लिए नारायण शिला में उमड़ी भीड़ - फोटो : अमर उजाला

जो व्यक्ति अपने पितरों का श्राद्ध नहीं करता, उसके पितृ आशीर्वाद नहीं बल्कि श्राप देकर जाते हैं। ऐसे व्यक्ति का घर दुखों और रोग से भर जाता है और वह जीवन में कष्ट भोगता है। इसलिए कहते हैं कि पितरों का श्राद्ध जरूर करना चाहिए। 
- पंडित मनोज त्रिपाठी, मुख्य पुजारी, नारायण शिला, मंदिर  

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