श्राद्ध यानी पितृ पक्ष 14 सितंबर से शुरू हो गए हैं। ऐसे में लोगों को मानना है कि पितृ पक्ष के दौरान कोई भी चीज खरीदना अशुभ होता है। लेकिन ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इन दिनों खास योग में कुछ चीजें खरीदना अशुभ नहीं बल्कि शुभ माना जाता है।
ज्योतिषाचार्य गौरव आर्य के अनुसार, 17 सितंबर को स्थायी जय, स्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि का योग है। श्राद्ध काल में द्विपुष्कर योग भी है। 18 सितंबर को यायी योग है। इन शुभ योग में नया वाहन, नवीन आभूषण, कपड़ा, जमीन या अन्य वस्तुओं की खरीद से पितरों का आशीर्वाद बरसता है।
ज्योतिषाचार्य डा. प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार शास्त्रों में 12 प्रकार के श्राद्धों का उल्लेख है। इस समय चार श्राद्ध ही प्रचलित हैं। ये हैं पार्वण, एकोदिष्ट, वृद्धि और सपिंडीकरण। वृद्धि श्राद्ध का अर्थ नांदिमुख श्राद्ध से है। श्राद्ध पक्ष में पितरों के निमित्त पार्वण श्राद्ध किया जाता है।
वार्षिक मृत्यु तिथि पर यहीं श्राद्ध होता है। शास्त्रों में कहा गया है कि अपने पितृ का श्राद्ध किसी भी कीमत पर किसी दूसरे के घर में नहीं करना चाहिए। लेकिन, गंगा आदि पवित्र नदियों के तटों पर श्राद्ध का विशेष महत्व है। वहीं अगर दूसरे प्रदेश में श्राद्ध किया जाए तो उस प्रदेश के स्वामी पितरों को भी जल देना चाहिए।
अगर मजबूरी में दूसरे के स्थान पर श्राद्ध करना पड़े तो स्थान का किराया चुकाकर श्राद्ध किया जा सकता है। शास्त्रों के अनुसार मनुष्य को श्राद्ध विमुख नहीं होना चाहिए। अपनी तिथि पर अपना हव्य लेने के लिए पितृगण पुत्र के द्वार पर आते हैं। उस दिन पुत्र यदि उनका पितृ का श्राद्ध न करे तो अमंलग दोष लगता है। जिन पितरों की तिथि याद न हो उनका श्राद्ध अमावस्या को करना चाहिए।