रुड़की स्थित पिरान कलियर धार्मिक स्थल है। यहां सभी धर्मों के लोग आते हैं। यहां मुख्य मजार साबिर पाक की है। इनके अलावा चार अन्य शख्सियत की मजारे भी हैं। कहते हैं कि यहां पर हर किसी की मुराद पूरी होती है।
साबिर पाक को हजरत अलाउद्दीन अली अहमद साबिर कलियरी भी कहा जाता है। जायरीन सबसे पहले इनकी जियारत करते हैं। साथ ही चादर पेश कर मुरादें मांगते हैं और प्रसाद पेश करते हैं।
इमाम साहब को हजरत इमाम अबू सालेह रहमतुल्लाह अलैहि कहा जाता है। ये उसूलों के पक्के और कौम के खिदमतगार थे। इनके दर्जनों ऐसे किस्से हैं, जिन्हें आज भी लोग याद करते हैं।
हजरत किलकिली साहब रहमतुल्लाह अलैहि (किलकिली साहब) के बारे में कहा जाता है कि जब यहां के रजा ने इंसानियत को शर्मसार कर डाला तो उन्होंने गुस्से में एक ऐसी चीख मारी कि सारा इलाका ही थर्रा उठा और उन्हें लोग किलकिली शाह के नाम से पुकारने लगे।
हजरत पीर गायब अली साहब की मजार पर लोग अपने चेहरे या किसी और जगह पर निकल आए मस्सों, गांठ से निजात पाने के लिए नमक और झाड़ू चढ़ाकर अपने लिए दुआ मांगते हैं। लोगों का मानना है कि ऐसा करने से परेशानी से निजात मिल जाती है।