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उत्तराखंड: तीन दिन के दौरे के बाद दिल्ली लौटे एनएसए अजीत डोभाल, साथ ले गए ये अनमोल भेंट

Sun, 25 Oct 2020 08:18 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ऋषिकेश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ऋषिकेश Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 25 Oct 2020 08:18 PM IST
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Nsa Ajit Doval Return To delhi With Precious Gift After three days uttarakhand visit
- फोटो : अमर उजाला

अपनी निजी यात्रा पर आए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल रविवार सुबह दिल्ली रवाना हो गए। इस दौरान वे अपने साथ एक अनमोल भेंट भी ले गए। दिल्ली रवाना होने से पहले परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने उन्हें गंगाजली भेंट की। स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने उन्हें विजयादशमी की शुभकामनाएं दी। 

Nsa Ajit Doval Return To delhi With Precious Gift After three days uttarakhand visit
- फोटो : अमर उजाला

अजीत डोभाल अपनी पत्नी अनु डोभाल, पुत्र शौर्य डोभाल और दोनों बेटियों के साथ तीन दिन की निजी यात्रा पर आए थे। स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि दशहरा पर्व को विजयादशमी संदेश एक ही है, सत्य की असत्य पर विजय है। हमारे शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि भगवान श्रीराम ने इसी दिन रावण का वध किया था। 

Nsa Ajit Doval Return To delhi With Precious Gift After three days uttarakhand visit
- फोटो : अमर उजाला

दशहरा पर्व को चाहे हम भगवान श्रीराम की रावण पर विजय के रूप में या फिर मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय के रूप में मनाए, दोनों ही रूपों में यह सत्य की असत्य पर विजय, शक्ति की आराधना और शस्त्रों के पूजन का ही पर्व है। भारतीय संस्कृति हमेशा से ही वीरता और शौर्य की उपासक रही है। 

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Nsa Ajit Doval Return To delhi With Precious Gift After three days uttarakhand visit
- फोटो : अमर उजाला

कहा कि हम प्रतिवर्ष दशहरा के अवसर पर दस सिर वाले रावण का दहन करते है, उससे हमें एक शिक्षा अवश्य लेनी चाहिए कि रावण के जो दस सिर थे वे मनुष्य के अंदर विद्यमान अवगुणों के ही प्रतीक हैं। 

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- फोटो : अमर उजाला

मनुष्य के अंदर भी कई बार काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, अहंकार, आलस्य, हिंसा और झूठ जैसे अवगुणों का समावेश हो जाता है जो हमारे स्वभाव का अंग होते हैं, कई बार हम जान नहीं पाते या पहचान नहीं पाते। दशहरा पर्व हमें उन अवगुणों का परित्याग करने की प्रेरणा देता है।

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