अधिकतर अभिभावक बच्चों को यह दवा खिलाते हैं, लेकिन इसे खिलाते वक्त कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। नहीं तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं।
सभी शासकीय अशासकीय विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को कुपोषण से मुक्त बनाने तथा रक्त की कमी की समस्या को दूर करने के लिए पेट में कीड़े मारने की दवा एल्बेंडाजोल खिलाई जाती है। घरों में भी बच्चों को यह दवा दी जाती है।
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बहादराबाद के प्रभारी डा. हेमंत आर्या ने बताया कि दवा का सेवन कराते समय कुछ सावधानी बरतनी जरूरी होती है। यदि किसी बच्चे का कोई गंभीर बीमारी का इलाज चल रहा है और वह नियमित रूप से दवा का खा रहा है या कोई भी बच्चा बीमार है तो उसे यह दवा नहीं दी जानी चाहिये।
डा. हेमंत ने बताया कि एक से दो वर्ष तक के बच्चों को आधी गोली का चूरा बनाकर खिलाया जाना चाहिए। दो से चार वर्ष तक के बच्चों को आधी गोली चबाकर खिलाई जानी चाहिए।
दवा खिलाते समय यह ध्यान रखे बच्चे दवा को चबाकर खाएं, जिन बच्चों के पेट में कीडों की अधिकता होगीं, उनके द्वारा दवा का सेवन करने पर यह मामूली लक्षण सामने आएंगे। जैसे दवा खाने के बाद जी मचलना, पेट में हल्का दर्द, उल्टी, दस्त और थकान महसूस होना, लेकिन इससे घबराने की जरूरत नहीं है। पेट में कीड़ा होने के कारण यह प्रतिकूल प्रभाव दिखाई देगा।