मसूरी: झड़ीपानी में रेलवे की जमीन पर बढ़ा विवाद, भारी पुलिस बल के साथ पहुंची टीम; 31 परिवारों को थमाया नोटिस
झड़ीपानी में रेलवे की कार्रवाई से सोमवार को अचानक माहौल गरमा गया। अधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी पहुंचे तो स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया और पूरे इलाके में तनाव की स्थिति बन गई।
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झड़ीपानी में रेलवे और स्थानीय लोगों का भूमि विवाद लगातार बढ़ रहा है। सोमवार को उस समय लोगों के बीच हड़कंप मच गया जब रेलवे की टीम भारी पुलिस बल के साथ पहुंचा और टीम ने 31 लोगों को 15 दिन के भीतर जमीन खाली करने के नोटिस थमा दिए साथ ही कई घरों में लोग नहीं मिले तो उनके मकानों पर नोटिस चस्पा कर दिए गए। अचानक बड़ी संख्या में पुलिस बल के साथ रेलवे अधिकारियों के पहुंचने से स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया। रेलवे ने नोटिस में चेतावनी दी है कि तय समय में भूमि खाली नहीं की गई तो बलपूर्वक बेदखली की कार्रवाई की जाएगी।
झड़ीपानी पहुंचे रेलवे के देहरादून के सीनियर सेक्शन इंजीनियर आशु शर्मा के नेतृत्व में पहुंची टीम ने संबंधित लोगों को नोटिस दिए। नोटिस में कहा गया है कि कब्जाधारी 15 दिन के भीतर स्वयं भूमि खाली कर दें। ऐसा नहीं करने पर रेलवे प्रशासन बलपूर्वक बेदखली के लिए कार्रवाई करेगा और कार्रवाई में होने वाला खर्च भी कब्जाधारियों से वसूला जाएगा। आशु शर्मा ने बताया कि रेलवे की ओर से पहले भी संबंधित लोगों को अपना पक्ष रखने और भूमि पर अधिकार से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया था।
बताया कि उत्तर रेलवे मुरादाबाद मंडल के संपदा अधिकारी प्रथम के न्यायालय में 31 लोगों को नोटिस दिए गए थे। इनमें 25 लोगों ने न्यायालय में अपना पक्ष रखा, लेकिन रेलवे के अनुसार भूमि के स्वामित्व से संबंधित दाखिल-खारिज अथवा अन्य ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इसके बाद संपदा न्यायालय ने उनके दावों को खारिज करते हुए भूमि खाली करने के आदेश दिए। कहा संपदा न्यायालय के आदेश के क्रम में 15 दिन का समय दिया गया है। इसके बाद न्यायालय के निर्देश के अनुसार जमीन को खाली कराया जाएगा ।
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स्थानीय लोगों ने कहा- उन्होने जमीन खरीदी है, रेलवे पहले अपना मालिकाना हक साबित करे
झड़ीपानी निवासी रानी ने कहा कि वह करीब 20 वर्षों से यहां निवास कर रहे है, उन्होंने सवाल उठाया कि जिन लोगों से उन्होंने जमीन खरीदी, रेलवे उन्हें नोटिस क्यों नहीं देता। उनका कहना है कि यदि रेलवे के पास जमीन के स्वामित्व के पुख्ता प्रमाण हैं तो उन्हें सामने रखा जाए।
प्रमाण मिलने पर वे स्वयं भूमि खाली कर देंगे। उन्होंने कहा कि मामला न्यायालय में चल रहा है, इसलिए अंतिम निर्णय का इंतजार किया जाना चाहिए। झड़ीपानी निवासी आशा देवी ने रेलवे पर लोगों को डराने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनके पास जमीन के कागज हैं और नगर पालिका में भी दस्तावेज दर्ज हैं। बिजली-पानी के कनेक्शन भी उनके नाम हैं। कहा उन्होंने पैसे देकर जमीन खरीदी है। उन्होंने कहा कि यदि रेलवे को जमीन पर आपत्ति है तो यहां वर्षों से रह रहे लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था की जाए। पूरे दस्तावेज होने के बाद भी रेलवे उनको परेशान कर रहा है ।