रविवार को हल्द्वानी स्थित सर्किट हाउस का नजारा गमगीन था। यहां आने वाले हर शख्स की आंखें नम थीं और जुबां पर एनडी के ‘नारायण’ होने चर्चा।
स्व. नारायण दत्त तिवारी के व्यक्तित्व के बारे में यह बात जानने के बाद भर जाएगी आपकी आंख
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उनके साथी रहे गोविंद सिंह नेगी पार्थिव शरीर से लिपटकर रो रहे थे। उन्हें अपने जिगरी को खोने का गम था। एनडी के प्रधानमंत्री नहीं बन पाने की टीस गोविंद को साल रही थी। कहने लगे यदि एनडी प्रधानमंत्री बने होते तो राज्य की तस्वीर बदल जाती।
सर्किट हाउस में रविवार को पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय नारायण दत्त तिवारी का शव अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था। जननेता को अपने बीच चिर निद्रा में लीन देखकर हर व्यक्ति रो रहा था।
गोविंद सिंह नेगी ने कहा कि 90 के दशक में नारायण का हारना राज्य के लिए दुर्भाग्यपूर्ण रहा। नारायण अगर जीते होते तो देश के प्रधानमंत्री होते और राज्य की तस्वीर बदल जाती। इस बीच नारा लगा ‘संघर्ष किया है संघर्ष करेंगे, विकास किया है विकास करेंगे’।
गोविंद के अनुसार नारायण ने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी बनाई थी और चुनाव चिन्ह झोपड़ी मिला था। प्रचार के दौरान लोगों से झोपड़ी में आने की बात करते थे। मानवीय संवेदनाएं ऐसी थी कि दूसरे को तकलीफ में देखकर नारायण की आंखें झलक जाती थीं।