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नव संवत्सर में ग्रहों के हेर-फेर से 'बेटा' बनेगा राजा और 'पिता' मंत्री, पड़ेंगे तीन ग्रहण

Sat, 30 Mar 2019 09:55 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal कौशल सिखौला, अमर उजाला, हरिद्वार
कौशल सिखौला, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 30 Mar 2019 09:55 PM IST
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Nav samvatsar astrology and prediction

नव संवत्सर के रूप में नया वर्ष छह अप्रैल 2019 को प्रारंभ हो जाएगा। ग्रहों की रचना देखने से पता चलता है कि आकाशीय ग्रह मंडल में पिता और पुत्र का राज चलेगा। बेटा राजा बनेगा और राजा बनते ही बेटा पिता को अपना मंत्री बना लेगा। आने वाले नवविक्रमी संवत में तीन ग्रहण पड़ रहे हैं, जिनमें एक कंकण होगा। भारतीय धर्म शास्त्रों के अनुसार भगवान शनिदेव सूर्य के पुत्र हैं। सूर्य पुत्र शनि अनेक कार्य अपने पिता के आज्ञा से करते हैं। इस बार कुछ अनोखा देखने को मिलेगा। वर्ष का राजपाट पुत्र शनि के पास आ रहा है।

Nav samvatsar astrology and prediction

खास बात यह है कि पुत्र ने आकाशीय नव ग्रहों के बजाय ग्रह मंडल के सरताज और अपने पिता सूर्य को ही अपना मंत्री बना लिया है। शास्त्रों और ज्योतिष के सिद्धांतों के अनुसार नव वर्ष का आरंभ जिस दिन होता है, वही दिन वर्ष का राजा बनता है। नया संवत इस बार छह अप्रैल शनिवार को बदल रहा है। फलत: वर्ष का राजपाट शनि के पास आ जाएगा। ज्योतिष के अनुसार सूर्य का मेष राशि में संक्रमण जिस वार को होता है, वही दिन वर्ष का मंत्री बनता है।
 

Nav samvatsar astrology and prediction

13 अप्रैल को पड़ रही बैशाखी से अगले दिन 14 अप्रैल रविवार को सूर्य नारायण का दिन है। अत: वर्ष का मंत्री पद सूर्य के पास आ जाएगा। आमतौर पर मकर संक्रांति का पुण्य काल हर वर्ष 14 जनवरी और मेष संक्रांति का पुण्य 14 अप्रैल को पड़ता है। प्रतिवर्ष 14 अप्रैल को जो भी दिन होगा, वही दिप वर्ष का मंत्री बन जाएगा। नये वर्ष में तीन ग्रहण पड़ रहे हैं।

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सूर्य ग्रहण

पहला ग्रहण दो जुलाई को खग्रास सूर्य ग्रहण के रूप में पड़ेगा। दूसरा ग्रह 16 जुलाई को खंडग्रास चंद्र ग्रहण के रूप में पड़ रहा है। 26 दिसंबर को तीसरा ग्रहण कंकणाकृति सूर्य ग्रहण के रूप में पड़ेगा। यह ग्रहण बहुत विशेष है, जिसकी प्रतीक्षा दुनिया भर के खगोल शास्त्रीयों को भी रहती है। नवरात्र में दुर्गाष्टमी का पर्व 12 अप्रैल और रामनवमी का पर्व 13 अप्रैल का मनाया जाएगा।

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ज्योतिष में संवत के पहले से दसवें दिन तक एक विशेष प्रकार की औषधि ग्रहण करने का विधान बताया गया है। ऐसा करने से वर्ष भर कोई भी रोग नहीं होता। आयुर्वेद चरक संहिता के अनुसार नीम के कोमल पत्ते, निंबोली, सेंधा नमक, काली मिर्च, ईमली, हींग, अजवाइन, जीरा और तुलसी दल कूट पीसकर शक्कर में मिला लें। इसे पानी में मिलाकर शरबत के रूप में पीने से रक्त विकार, वात पित्त और कफ के तमाम रोग मिट जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार संवत के पहले दिन से दसवें दिन तक सवेरे के समय यह औषधीय शरबत पीने से संपूर्ण आरोग्य की प्राप्त एक वर्ष के लिए हो जाती है। 

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